कमाल है हम भी कितने अज्ञानी हैं। हमारे आस-पास इतने सारे शुभ चिंतक हैं और हम ही को पता नहीं है। भगवान का शुक्र है कि नगर निगम, नगर पालिका का चुनाव आ गया और हमको इनके बारे में पता चल गया। अन्यथा हम तो अज्ञान के अंधेरे में ही रह जाते। चुनाव की आहट पाते ही क्षेत्र में अचानक से कर्मठ, जुझारू, मेहनती, कर्मशील, शिक्षित, बेटा, बेटी, भाई, बहन, और ना जाने कैसे-कैसे लोग और रिश्ते नाते निकल आए। कितने ही मिलनसार, सुख-दुख के साथी सामने आ चुके हैं। कमाल की बात ये है कि हमारे आस पास इतने मजबूत और भले लोग रह रहे थे और हमको उनके बारे में जानकारी ही नहीं थी। अगर जानकारी होती तो समाज के हित में आप और हम ऐसे लोगों से ना जाने कितने ही काम करा लेते। हमारे इस अज्ञान से समाज का कितना नुकसान हुआ है इसका तो अंदाजा तक लगाना संभव नहीं है। ऐसा नहीं है कि सभी एक जैसे हैं। बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होनें कोविड काल में अपनी क्षमता से कहीं अधिक जा कर लोगों की सहायता की थी। अजय गुप्ता जैसे लोग भी हैं जिन्होनें जरूरत मंद लोगों को राशन, दवाई दी, आक्सिजन उपलब्ध कराई, अस्पतालों में बेड की व्यवस्था कराई और कोई राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास नहीं किया। कोविड के उस समय में कुछ पार्षदों जैसे हिमांशु लव, मनोज गोयल, सरदार सिंह भाटी, अजय शर्मा, रेखा जैन, नीलम भारद्वाज, ने बहुत सराहनीय काम किया था। कई सामाजिक संस्थाएं भी मददगार रहीं थीं। मगर आजकल ऐसे अनेक समाजसेवी मैदान में हैं जो पहले कभी देखे ही नहीं गए थे। मगर इन लोगों का अपने क्षेत्र, वहां की जनता और समाज के लिए समर्पण देख कर अचरज होता है। वोट बनवाने की जितनी चिंता इनको है उतनी तो आपको अपने बच्चों की भी नहीं होगी। आपने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि आपके आसपास इतने रिश्ते नाते घूम रहे हैं, जिनको आपकी आपसे अधिक चिंता रहती है।