युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। एक ही जिले में पिछले आठ से दस साल से टिके स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों पर अब तबादले की तलवार लटक रही है। एमएलसी चुनाव सम्पन्न होते ही प्रदेश स्तर से तबादला एक्सप्रेस शुरू हो जाएगी। जिसके लपेटे में स्वास्थ विभाग के करीब ७० फीसदी अधिकारी और कर्मचारी भी आ सकते हैं। करीब दो सााल पहले ही प्रदेश सरकार ने बड़े स्तर पर प्रदेश भर में दस साल से एक ही जिले में जमे बाबूओं का तबादला किया था, जिसे लेकर कर्मचारियों ने आंदोलन भी किया था।
इस दौरान भी जिले में कई बाबू थे जो बच गए थे, लेकिन इस बार यह सभी इस घेरे में आ सकते हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग से लेकर तीनों जिला अस्पताल, सभी सीएचसी, पीएचसी सहित स्वास्थ्य केन्द्रों में बड़ी संख्या में ऐसे अधिकारी और कर्मचारी तैनात हैं जिन्हें जिले में तैनात हुए दस साल का समय हो चुका है। जबकि नियमानुसार एक मंडल में ही लगातार दस साल रहा जा सकता है और जिले में अधिकतम तीन साल साल, लेकिन अपनी पहुंच के चलते यह अधिकारी और कर्मचारी जिले से जाने को तैयार नहीं है। प्रमोशन मिलने के बाद भी इनसे जिले का मोह नहीं छूट पा रहा है, लेकिन जिले में लम्बे समय से टिके इन कर्मियों की लिस्ट बन चुकी है।
१५ अप्रैल तक एमएलसी चुनाव की आचार संहिता समाप्त हो जाएगी। इसके बाद प्रदेश भर में बड़े स्तर पर विभागों में तबादलों का दौर शुरू हो जाएगा। ऐसे में सरकारी कर्मियों ने अपने तबादले रूकवाने या मनपंसद जिले में तैनाती लेने के लिए अभी से भागदौड़ शुरू कर दी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो जिले के कई अधिकारी लखनऊ में बैठे अपने आकाओं के सम्पर्क में बने हुए हैं जिससे तबादला रोका जा सके। विभागों में तबादलों को लेकर कर्मियों में हलचल साफ देखी जा सकती है। लेकिन अगर शासन की सूची के अनुसार स्वास्थ्य विभाग में तबादले हुए तो ७० फीसदी को जिला छोडक़र जाना पड़ सकता है।