एक शेर है कि- जरा सा कुदरत ने क्या नवाजा, कि आके बैठे हो पहली शफ में। मतलब कि भगवान की थोड़ी मेहरबानी क्या हुई लोग दूसरों को पीछे करते हुए सबसे आगे की लाइन में बैठने की कोशिश करने लगते हैं। वह ये भूल जाते हैं कि अगर आप सम्मान के हकदार हैं तो आपको वह सम्मान खुद ब खुद मिलेगा ही। किसी भी कार्यक्रम को याद करके देखिए आप पाएंगे कि किस तरह लोग सबसे आगे बैठने को आतुर रहते हैं। मगर गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा इस मामले में सबसे अलग दिखाई दिए। हालांकि पुलिस विभाग में और सामान्य सोच विचार में भी गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को कठोर, हनक वाला, एकांकी अधिकारी माना जाता है। लेकिन कल पत्रकार आशुतोष गुप्ता के भाई की शोकसभा थी। इसमें शहर के अनेक नेता, पत्रकार, समाजसेवी शामिल हुए। शोकसभा में गाजियाबाद के पुलिस कमिशनर अजय कुमार मिश्रा भी पहुंचे। अपनी श्रद्घांजलि देने के बाद वह सबसे पीछे एक बेहद सामान्य व्यक्ति की तरह जाकर बैठ गए। लोगों ने उनसे सोफे पर बैठने का आग्रह किया। कुछ ने अपनी कुर्सी की ऑफर की, मगर उन्होनें बड़ी शालीनता से सिर हिलाकर इंकार कर दिया और अकेले ही काफी देर बैठे भी रहे। एक पुलिस कमिश्नर को इस तरह लोगों की सबसे अंतिम पक्ति में नीचे बैठा देखकर हर कोई हैरान था। पहले तो लोगों को समझ ही नहीं आया कि यह हो क्या रहा है। मगर जब उन्होनें अजय कुमार मिश्रा को श्रद्घा के साथ सिर झुकाए बैठे देखा तो उनकी समझ में आया कि यह अधिकारी थोड़ा अलग है। सौम्य है, शालीन है, सादगी से परिपूर्ण है। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोगों के मन में पुलिस कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा के प्रति सम्मान और अधिक बढ़ गया।