युग करवट ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत गिरफ्तारी के ईडी के अधिकार को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि ईडी की गिरफ्तारी की प्रक्रिया मनमानी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के कई प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया। हालांकि, कोर्ट ने कानून में फाइनेंस बिल के जरिए किए गए बदलाव के मामले को 7 जजों की बेंच में भेज दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ईडी के जांच, गिरफ्तारी और संपत्ति को अटैच करने के अधिकार को बरकरार रखा है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि जांच के दौरान ईडी, एसएफआईओ, डीआरआई अधिकारियों (पुलिस अफसर नहीं) के सामने दर्ज बयान भी वैध सबूत हैं। इसके साथ ही बेंच ने कहा, आरोपी को ईसीआईआर (शिकायत की कॉपी) देना भी जरूरी नहीं है। यह काफी है कि आरोपी को यह बता दिया जाए कि उसे किन आरोपों के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है।
पीएमएलए कानून के तहत गिरफ्तारी, जमानत देने, संपत्ति जब्त करने का अधिकार सीआरपीसी के दायरे से बाहर है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में पीएमएलए एक्ट को असंवैधानिक बताते हुए कहा गया था कि इसके सीआरपीसी में किसी संज्ञेय अपराध की जांच और ट्रायल के बारे में दी गई प्रक्रिया का पालन नहीं होता है। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने पीएमएलए एक्ट के तहत ईडी के अधिकार को बरकार रखा है।