गाजियाबाद। देश के पहले सीडीएस बिपिन रावत की बहादुरी के किस्से एक नहीं अनेक हैं और कल भी उन्होंने आखिरी समय में भी बहादुरी दिखाई।
दिवंगत चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल बिपिन रावत की बहादुरी के किस्से जगजाहिर है। उन्होंने अपनी सर्विस के करीब दो तिहाई कार्यकाल सीमाओं पर बिताया। कभी उत्तर पूर्व के राज्यों में तो कभी चीन सीमाओं पर तैनात रहे। उन्हीं की देखरेख में पाकिस्तान के बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी। उन्होंने अपने अंतिम समय में भी बहादुरी के ऐसे उदाहरण पेश किए कि दूसरे सैनिकों के लिए मिसाल बनेगी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के बाद एमआई-17वी5 के दुर्घटना होने के बाद वे मलबे में दबे हुए थे। करीब दस मिनट तक वे मलबे में दबे रहे। इसके बाद खुद ही बाहर निकलने का प्रयास किया। उनका शरीर पूरी तरह जल गया था।
एक ग्रामीण की नजर उन पर पड़ी। उसने उन्हें बाहर निकाला। खुद को बाहर मलबे से निकाले जाने पर उन्होंने हिंदी में अपना नाम भी बताया था। जनरल रावत के साथ एक अन्य सवार को भी निकाला गया था। बाद में उनकी पहचान ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह के रूप में हुई। ग्रुप कैप्टन हादसे में जिंदा बचे एकमात्र व्यक्ति है। उनका अभी इलाज चल रहा है। दुर्घटना के बाद घटना स्थल पर पहुंचे वरिष्ठ फायरमैन और बचावकर्मी एनसी मुरली ने बताया कि हमने दो लोगों को जिंदा बचाया। इनमें से एक सीडीएस रावत थे। मुरली ने बताया कि जैसे ही हमने उन्हें बाहर निकाला, उन्होंने रक्षा कर्मियों से हिंदी में धीमे स्वर में बात की और अपना नाम बोला। अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। मुरली के अनुसार, वो तुरंत दूसरे व्यक्ति की पहचान नहीं कर सके जिसे अस्पताल ले जाया गया और उसका अभी इलाज चल रहा है।
मुरली ने कहा कि जनरल रावत ने बताया कि उनके शरीर के निचले हिस्से में गंभीर चोटें आई हैं। इसके बाद उन्हें चादर में लपेट कर एम्बुलेंस में ले जाया गया। बचाव दल को इस इलाके को बचाव कार्यों में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यहां आग बुझाने के लिए दमकल वाहन को ले जाने के लिए कोई रास्ता नहीं था। मुरली ने कहा कि हमें पास की नदी और घरों से बर्तनों में पानी लाना पड़ता था। ऑपरेशन इतना कठिन था क्योंकि हमें लोगों को बचाने या शवों को निकालने के लिए हेलिकॉप्टर के नुकीले टुकड़ों को अलग करना पड़ा।
मुरली ने बताया कि बचाव कार्य में एक उखड़ा हुआ पेड़ बाधा बन गया। इसे काटना पड़ा। इस सब ने हमारे बचाव कार्य में देरी की। उन्होंने बताया कि हमने 12 शव बरामद किए। दो लोगों को जिंदा निकाल लिया गया, दोनों गंभीर रूप से झुलस गए थे। बाद में भारतीय वायुसेना के जवान आधे रास्ते में बचाव अभियान में शामिल हो गए। वे टीम को हेलिकॉप्टर के क्षतिग्रस्त हिस्सों में ले गए। सीनियर फायरमैन ने कहा कि मलबे के बीच हथियार पड़े थे। इसलिए हमें सावधानी से ऑपरेशन करना पड़ा।