नगर संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। गाजियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन आज कई समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने जा रही थी। मगर गाजियाबाद प्रशासन ने उनके ऑफिस पर पुलिस का पहरा बैठा दिया। एक तरह से पुलिस प्रशासन ने सभी पदाधिकारियों को नजरबंद कर दिया। एसोसिएशन का कहना है कि प्रशासन का यह व्यवहार गलत है और अभिभावक विरोधी है। जो न्यायसंगत नहीं है। एसोसिएशन मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर शिक्षा के बढ़ते व्यापारीकरण पर रोक लगाने की मांग के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने की तैयारी में थी। मुख्यमंत्री को देने के लिए जो ज्ञापन तैयार किया गया था उसमें कई महत्वपूर्ण मांगे रखी गईं। इनमें आरटीई के तहत स्कूल में दाखिले नहीं करने वाले स्कूलों की मान्यता समाप्त करने, सरकारी स्कूलों का जीर्णाद्घार कर वहां शिक्षा और सुविधा के स्तर को बढ़ाने, प्रत्येक जिले में पांच-पांच सैनिक स्कूल खोलने, सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त हर जिले में दस स्कूल खोलने, प्रत्येक सांसद विधायक आदि द्वारा सरकारी स्कूल गोद लेकर उनमें शिक्षा के स्तर को सुधारने, प्रत्येक स्कूल में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम सख्ती से लागू करने की मांग की गई।
इनके अलावा निजी स्कूलों की पांच साल की बैलेंस सीट जांच करने, शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने, निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा को समाजसेवा से जोडऩे तथा इसे लाभ या व्यवसाय का क्षेत्र नहीं बनने देने, फीस अधिनियम २०१८ को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की गई है। यह ज्ञापन गाजियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन के सचिव अनिल सिंह की तरफ से मुख्यमंत्री के लिए तैयार किया गया था। मगर ऑफिस पर पुलिस लगी होने के कारण एसोसिएशन ज्ञापन नहीं दे पाई।