नई दिल्ली। कांग्रेस अपने सियासी इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। कांग्रेस आठ सालों से देश की सत्ता से कांग्रेस बाहर है और एक के बाद एक राज्यों की सत्ता से दूर होती जा रही है। ऐसे मुश्किल दौर में कांग्रेस ने तीन दिवसीय चिंतन शिविर उदयपुर में बुलाया है, जहां पर पार्टी नेतृत्व का संकट, आपसी गुटबाजी पर चिंतन करेगी और आगामी चुनाव में जीत की राह तलाशेगी। कांग्रेस आलाकमान ने आज से 15 मई तक चिंतन शिविर शुरु किया।
कांग्रेस में सबसे बड़ी दिक्कत पार्टी के नेतृत्व को लेकर है। 2019 लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के पास कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं है। ऐसे में कांग्रेस में एक ऐसे नेता की तलाश है जो कांग्रेस को एक स्पष्ट और मजबूत नेतृत्व दे सके। इतना ही नहीं वह कार्यकर्ताओं में जान फूंक सके। आम लोगों के साथ-साथ सहयोगी दलों को भी भरोसा दिला सके कि कांग्रेस ही है, जो देश में भाजपा से हर स्तर पर मुकाबला कर सकती है और मजबूत विकल्प भी बन सकती है। कांग्रेस नेतृत्व को लेकर उहापोह के कारण अगस्त 2020 में कांग्रेस के कई असन्तुष्ट नेताओं ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर पार्टी में बड़े बदलावों की मांग की थी। माना गया कि इस चिट्ठी का निशाना मूलरूप से राहुल गांधी थे। ऐसे में नेतृत्व को लेकर उठते सवालों का कांग्रेस को चिंतन शिविर में एक भरोसेमंद चेहरा तलाशना होगा, जो पीएम नरेंद्र मोदी से मुकाबला कर सके। कांग्रेस मजबूत नेतृत्व के अभाव में बीजेपी के खिलाफ मुद्दे तो उठाती है, लेकिन वो लोगों के मन में अपनी बातों को बैठा नहीं पाती है।
कांग्रेस के लिए सबसे पहले अपनी सियासी जमीन बचाना सर्वोपरि है और गठबंधन दूसरी प्राथमिकता। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस का सियासी ग्राफ गिरा है। महज दो राज्यों में कांग्रेस के मुख्यमंत्री है और और लोकसभा व राज्यसभा मिलाकर सौ से कम सांसद हैं। ऐसे में वक्त का तकाजा है कि कांग्रेस आंख मूंदकर कदम बढ़ाने के बजाय पहले अपनी सिकुड़े राजनीतिक आधार को वापस हासिल करे ताकि भाजपा का मुकाबला कर सके। दो साल के बाद 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले 11 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस को चिंतन शिविर में भाजपा को चुनावी मात देने का मंत्र तलाशना होगा।
उत्तर भारत में कांग्रेस के हाथ से जिस तरह से बड़े राज्य निकल रहे हैं, उस पर भी मंथन होगा। देश में 180 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस शून्य है। सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश, बंगाल, बिहार में तो कांग्रेस हाशिए पर है, जहां पर उसे बीजेपी से मुकाबला करने के लिए गठबंधन का रास्ता तलाशना होगा। ऐसे में चिंतिन शिविर में यह बात तय होगी कि कांग्रेस 2024 के चुनाव में एकला चलों की राह पर चलेगी या फिर गठबंधन का रास्ता अख्तियार करेगी। कांग्रेस संगठन चुनाव की प्रक्रिया चल रही है और अगस्त में अगले अध्यक्ष का चुनाव होना है। उदयपुर के चिंतन शिविर में अगले अध्यक्ष को लेकर चर्चा नहीं होगी। ऐसे में कांग्रेस का अध्यक्ष गांधी परिवार से होगा या फिर बाहर का। कांग्रेस में एक गुट है जो गांधी परिवार से बाहर के नेताओं को पार्टी की कमान सौंपने की वकालत कर रहे है तो कुछ लोग राहुल गांधी को पक्ष में है।