युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। एसएसपी पवन कुमार के सस्पेंशन के बाद पुलिस महकमे में हो रही चर्चा के दौरान पुलिस अधिकारी एवं जवान यह कहते दिखाई दिये कि जिस आईपीएस अधिकारी ने जनपद पुलिस की कप्तानी का निर्वहन करते हुए जनहित एवं कर्तव्यनिष्ठा को सदैव प्राथमिकता दी, उसी ईमानदार एसएसपी पवन कुमार को शासन ने एक साजिश के तहत जनसुनवाई में लापरवाही एवं काम में अनियमिता जैसे कई भ्रामक आरोप लगाकर निलंबित कर दिया। अधिकारी व कर्मचारी यह कहते हुए हुए भी दिखाई दिये कि निवर्तमान कप्तान पवन कुमार कितने संवेदनशील है इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि एक बार वह एक सिपाही का निलंबन करने के बाद अपने आंसू नहीं रोक पाये थे। वो अपने मातहत अधिकारियों एवं जवानों के सुख-दुख में न केवल हर समय शरीक होते थे बल्कि किसी भी समस्या का समाधान निकालने में देर नहीं लगाते थे। रही बात जनसुनवाई की तो गाजियाबाद पुलिस व्यवस्था के इतिहास में वह ऐसे पहले कप्तान रहे जो फरियादियों की अधिकता होने, किसी के असाय होने या फिर सीनीयर सिटीजन की समस्या सुनने के लिये अपनी कुर्सी छोडक़र फरियादियों के बीच बाहर ही आ जाते थे। जनसुनवाई के लिये वह तीन-तीन बजे तक अपने कार्यालय में ही बैठे दिखाई देते थे। रही बात अपराध पर अंकुश लगाने की तो उनके कार्यकाल में जितनी भी संगीन वारदातें घटित हुई उनमें से अधिकांश अपराधिक घटनाओं का खुलासा हो गया। बता दें कि जिस दिन उन्होंने जनपद पुलिस मुखिया की बागडोर संभाली थी उसी दिन कविनगर थाना क्षेत्र के आरडीसी क्षेत्र में चावल कारोबारी से ४५ लाख की सनसनीखेज लूट दिनदहाड़े हुई थी। उनकी कर्तव्यपिष्ठा और अपराध रोकने की प्रबल इच्छा का उदाहरण इससे बेहतर और क्या हो सकता है कि वह गाजियाबाद में आमद के साथ ही चार्ज लेने से पहले घटनास्थल पर पहुंच गये थे। उनके प्रयास की वजह से ही उस सनसनीखेज लूट के खुलासे में देर नहीं लग पाई थी।