– रोहित शर्मा –
गाजियाबाद। ‘लडक़ी हूं, लड़ सकती हूं’ थीम पर चलते हुए कांग्रेस यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रही है। पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव एवं यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी को पूरी उम्मीद है कि इस बार महिलाएं उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की डगमगाती नैया को चुनावी नदी पार करा देंगी। यही कारण है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने चालीस प्रतिशत महिलाओं को टिकटों में आरक्षण देने की घोषणा भी कर दी है। धीरे-धीरे समय अब इस वायदे को निभाने और उत्तर प्रदेश में बेहतर चुनाव परिणाम लाने का आता जा रहा है। उत्तर प्रदेश की कसौटी पर खरा उतरने के लिए अब प्रियंका गांधी कुछ चौंकाने वाले निर्णय भी लेने जा रही हैं। खबर है कि गाजियाबाद जनपद की किसी विधानसभा सीट से कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं तेज तर्रार महिला नेता अलका लांबा को चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। अलका लांबा को चुनाव मैदान में उतारे जाने के लिए साहिबाबाद या मुरादनगर विधानसभा सीट मुफीद बताई जा रही है।
दरअसल, कांग्रेस का चुनावी गणित उत्तर प्रदेश की सरजमीं पर आकर लड़खड़ा जाता है। जातिगत आंकड़ों में फंसकर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सभी सियासी समीकरण फेल हो जाते हैं। कांग्रेस हर बार विधानसभा चुनाव के दौर में उत्तर प्रदेश के सियासी भंवर को पार करने के प्रयास करती है लेकिन और धंसती चली जाती है। पिछली बार यानि 2017 के विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी दल समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन भी कांग्रेस के काम नहीं आया था। सपा के साथ गठबंधन में कांग्रेस के खाते में 105 सीटें आई थीं। चुनाव हुए तो कांग्रेस की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। कांग्रेस के खाते में उत्तर प्रदेश से मात्र 7 सीटें आईं। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा किया गया यह न्यूनतम सियासी स्कोर था। इस बार होने वाले चुनाव में कांग्रेस की हवा कुछ बदली हुई दिखाई दे रही है। कांग्रेस को राजनीतिक रसातल से बाहर निकालने के लिए खुद प्रियंका गांधी मैदान में आ चुकी हैं। उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस बार महिलाओं के सहारे कांग्रेस की नैया चुनावी वैतरणी जरूर पार कर जाएगी। कम से कम कांग्रेस के खाते में सम्मानजनक सीटें लाने की चुनौती प्रियंका गांधी के कंधों पर है। प्रियंका गांधी ने छात्राओं को स्कूटी और मोबाइल फोन और अन्य सहायताएं देने संबंधित तमाम घोषणाएं यूपी में कर दी हैं। साथ ही राजनीति में आगे लाने की बात कहते हुए प्रियंका गांधी ने महिलाओं को विधानसभा चुनाव में चालीस प्रतिशत टिकट देने की घोषणा भी की है। अब बड़ा सवाल है कि उत्तर प्रदेश की चालीस प्रतिशत यानि 403 सीटों में से कम से कम 160 सीटों पर चुनाव लडक़र जीतने वाली महिलाएं पार्टी कहां से लाएगीï? इस सवाल का जवाब पार्टी ने तलाशना भी शुरू कर दिया है। तय माना जा रहा है कि गाजियाबाद जनपद की कम से कम दो सीटें महिलाओं के खाते में जाएंगी। अब बड़ा सवाल है कि ये दो सीटें कौन सी होंगी और कौन महिला प्रत्याशी गाजियाबाद जनपद के विधानसभा के रण में उतरेगी।
पार्टी के सूत्रों की मानें तो कांग्रेस की तेज तर्रार नेत्री और राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली की चांदनी चौक सीट से विधायक रहीं अलका लांबा को गाजियाबाद की किसी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी पार्टी कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि साहिबाबाद या मुरादनगर विधानसभा सीट से अलका लांबा को चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। अलका लांबा ने छात्र नेता के रूप में अपने राजनीतिक कैरियर की शुरूआत की थी। वे दिल्ली विश्वविद्यालय से जीतकर छात्र संघ की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। एनएसयूआई में राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर भी वे काम कर चुकी हैं। अखिल भरतीय कांग्रेस कमेटी में सचिव भी रही हैं। 2014 में वे कांग्रेस छोडक़र आम आदमी पार्टी में चली गई थीं। 2015 में उन्होंने आम आदमी पार्टी के टिकट पर चांदनी चौक से विधानसभा चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी। 2019 में फिर से कांग्रेस में वापस आ गईं। दिल्ली के पास होने के कारण साहिबाबाद सीट उनके लिए मुनासिब हो सकती है। इसके अलावा मुरादनगर विधानसभा सीट से भी कांग्रेस उन्हें उतार सकती है। दरअसल अलका लांबा जाट बिरादरी से आती हैं और मुरादनगर को जाट बहुल्य विधानसभा माना जाता है। ऐसे महिला के साथ-साथ जाट होना उनके लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है।