• स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग ने कहा-जिनके लिए भेजे गए थे उन्हें नहीं मिला इंजेक्शन
  •  प्रशासन रेमडेसिविर इंजेक्शन का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करें
    युग करवट संवाददाता
    गाजियाबाद। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। लोगों को हुई परेशानियों को लेकर प्रदेश के स्वास्थ्य राज्यमंत्री को निशाना बनाया जा रहा था लेकिन हकीकत यह है कि प्रदेश सरकार की ओर से जिले को पर्याप्त संख्या में रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए थे। वे इंजेक्शन आखिर गए कहां थे, किसने किसको दिया, इस बात की जानकारी किसी को नहीं है। स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग ने अब पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने डीएम से पूरी रिपोर्ट देने को कहा, जिसमें विस्तृत विवरण होना चाहिए कि किस-किस मरीज को रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया गया।
    अतुल गर्ग ने युग करवट को बताया कि कोरोना की दूसरी लहर के शुरुआती दिनों में वे लखनऊ में थे और उन्हें रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिलने और कालाबाजारी की लगातार शिकायत मिल रही थी तो 18 अप्रैल को गाजियाबाद के कोविड कंट्रोल रूम के प्रभारी को पत्र लिखकर रेमडेसिविर इंजेक्शन के वितरण की विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। लेकिन उन्हें रिपोर्ट नहीं दी गई।
    अतुल गर्ग ने कहा कि जिस समय कोरोना की दूसरी लहर चरम पर थी, उस समय गाजियाबाद में रेमडेसिविर की जमकर कालाबाजारी हुई। प्रशासन और अधिकारी दावा करते रहे कि रेमडेसिविर की सप्लाई को लेकर समुचित व्यवस्था बनाई गई लेकिन मरीजों को इंजेक्शन नहीं मिल रहा था। मजबूरी में मरीजों की जान बचाने के लिए परिजन ब्लैक में इंजेक्शन खरीद रहे थे।
    अतुल गर्ग ने कहा कि 23 अप्रैल को उन्होंने अभिहित अधिकारी को पत्र लिखकर कहा कि दस निजी अस्पतालों को 270 रेमडीसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराने की जो सूची दी गई थी उनमें मरीजों का नाम या मोबाइल नंबर नहीं था। इससे पता नहीं चल पाया कि वाकई में मरीजों को रेमडीसिविर इंजेक्शन दिया गया था या नहीं। उन्होंने कहा कि 25 अप्रैल को उन्होंने औषधि निरीक्षक अनुरोध कुमार को पत्र लिखकर कहा कि गाजियाबाद के अलग-अलग अस्पतालों के लिए 270 रेमडीसिविर इंजेक्शन भेजे गए थे, लेकिन किसी भी मरीज को इंजेक्शन नहीं मिला। सरकार की ओर से भेजे गए 270 इंजेक्शन के अलावा सिप्ला कंपनी की ओर से भी गाजियाबाद में रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए थे। जबकि औषधि निरीक्षक और अभिहित अधिकारी ने सूचित किया कि 21 से 24 अप्रैल तक डीलर की ओर से रेमडेसिविर इंजेक्शन आवंटित नहीं किया गया था।
    स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने कहा कि ब्लैक में इंजेक्शन खरीदे जाने की शिकायत पर प्रशासन एवं औषधि निरीक्षण को चार बार पत्र लिखकर ब्योरा मांगा गया। उन चारों पत्रों को भी साथ में संलग्न किया गया है जिसमें लिखा गया था कि विभिन्न अस्पतालों में भर्ती मरीज पूछ रहे है कि उन्हें इंजेक्शन क्यों नहीं मिल रहा है। जबकि अस्पताल ब्लैक में इंजेक्शन देने को तैयार है। लेकिन अधिकारियों ने पत्र का जवाब नहीं दिया।
    अतुल गर्ग ने युग करवट को बताया कि मुख्यमंत्री ने स्पष्टï रूप से आदेश दिया है कि रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की कालाबाजारी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। सरकार की ओर से भेजे गए रेमडेसिविर इंजेक्शन का पूरा ब्यौरा मिलने के बाद अगर अधिकारी दोषी पाए जाएंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। अतुल गर्ग ने कहा कि अधिकारियों से रेमडेसिविर और ऑक्सीजन सप्लाई का ब्यौरा देने से कन्नी काट रहे हैं। अधिकारी उन सभी अस्पतालों और फार्मेसी का ब्योरा देने से भी बच रहे हैं जिन्हें इंजेक्शन मुहैया कराए गए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को हर हाल में पूरा ब्यौरा देना ही होगा। ऐसे वक्त जब मरीजों के तीमारदार रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए इधर-उधर भटक रहे थे, अधिकारियों के परिचित औ रिश्तेदार, जो संक्रमित हो गए थे, उन्हें रेमडेसिविर इंजेक्शन आसानी से मिल गया था। अतुल गर्ग ने कहा कि वे इसकी तह तक जाएंगे और अवश्य पता लगाएंगे कि सरकार की ओर से भेजे गए रेमडेसिविर इंजेक्शन आखिर गए कहां। इसके लिए उन्हें जो भी करना पड़े, वो करेंगे लेकिन कालाबाजारी करने वाले को बेनकाब करके ही रहेंगे।