प्रमुख संवाददाता
गाजियाबाद(युग करवट)। हाउस टैक्स रिकवरी को लेकर नगर निगम अब और भी सख्ती दिखाने जा रहा है। निगम का प्राइवेट प्रॉपर्टी पर ही करीब 113 करोड़ रूपये टैक्स बकाया है। निगम का दावा है कि ये लोग लंबे समय से टैक्स अदा नहीं कर रहे हैं। निगम अब आवासीय प्रॉपर्टी से टैक्स की वसूली करने के लिए सीलिंग की कार्रवाई करने की तैयारी में है। इसके लिए शासन को एक पत्र लिखकर नगर निगम ने इस अधिकार के प्रयोग करने की स्वीकृति मांगी है।
-होगी सील प्रॉपर्टी: अभी तक नगर निगम के पास गैर आवासीय प्रॉपर्टी को खाली कराकर उसे सील करने का अधिकार नहीं है। पूर्व में सरकार ने हाउस टैक्स अदा नहीं करने पर पीने के पानी और सीवर कनेक्शन काटने का नगर निकायों को अधिकार दिया था। मगर ऐसे मामले में कोर्ट का आदेश है कि यह आवश्यक सेवा का मामला है। ऐसे में नगर निगम चाहते हुए भी पानी कनेक्शन और सीवर कनेक्शन काट कर बकाया टैक्स अदा करने का दबाव नहीं बना सकता है। ऐसे में अब नगर निगम ने राज्य सरकार से मांग की है कि शहर में अवस्थापना सुविधाओं को विकसित करने के लिए पैसे की जरूरत होती है। ऐसे में उन्हें अगर कोई टैक्स अदा नहीं करता है तो ऐसे आवासीय भवनों को भी सील करने की इजाजत मांगी है।
-113 करोड़ बकाया टैक्स है आवासीय प्रॉपर्टी पर: निगम का कहना है कि 113 करोड़ रूपये का टैक्स आवासीय प्रॉपर्टी पर है। करीब 60 प्रतिशत ऐसे लोग है जिन पर पांच से अधिक समय से बकाया अदा नहीं कर रहे है। इन लोगों को बार बार नोटिस जारी किया जाता है इसके बाद निगम का टैक्स अदा नहीं किया जाता है।
-सरकारी विभाग दबाए बैठे है 191 करोड़ टैक्स:नगर निगम का केंद्र और राज्य सरकार के विभागों पर अभी तक का करीब 191 करोड़ रूपये टैक्स बकाया है। नगर निगम सरकारी विभागों से केवल सर्विस टैक्स लेता है। अगर प्राइवेट और सरकारी विभागों पर बकाया जोड़ दे तो यह 327 करोड़ रूपया होता है। जो एक वर्ष में नगर निगम द्वारा रोपित करीब 150 करोड़ टैक्स के दोगुना से भी अधिक है।
-निगम का फंसा है 327 करोड़ का टैक्स:निगम का बकाया कई सौ करोड़ रूपये का टैक्स लोग अदा नहीं कर रहे है। निगम का दावा है कि उसका प्राइवेट लोगा निगम अपनी इनकम बढ़ाने के लिए हाल ही में हाउस टैक्स में वृद्धि का प्रस्ताव लेकर आया था। मगर निगम का सरकारी और गैर सरकारी प्रॉपर्टी से अपना करीब 327 करोड़ रूपये का टैक्स वसूल नहीं पा रहा है। इनमें से करीब 113 करोड़ रूपये प्राइवेट और 191 करोड़ रूपये का सर्विस टैक्स केंद्र और राज्य सरकार के विभागों के ऊपर है।
-43 करोड़ टैक्स पर विवाद:निगम का कहना है कि जो कुल 327 करोड़ रूपये बकाया है उसमें से करीब 43 करोड़ रूपया बकाए पर विवाद है। इस मामले में संबंधित लोगों के साथ निगम का केस चल रहा है। अगर इस रकम को घटा दिया जाए तो भी नगर निगम का करीब 284 करोड़ रूपये बकाया है। निगम का कहना है कि अगर यह बकाया मिल जाए तो शहर में विकास कार्य और स्पीड के साथ होंगे।
-वर्जन:निगम ने बकाएदारों की एक सूची तैयार कराई है। उसमें हिसाब से निगम का सभी तरह का मिलाकर 327 करोड़ बकाया है। सरकार को इस संबंध में रिपोर्ट भेजी गई है। जिसमें लंबे समय से बकाया नहीं देने पर कार्रवाई के लिए और अधिकार की निगम ने मांग की है।