युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के लगभग सवा महीने बाद शनिवार को रालोद नेता एवं कार्यकर्ता समीक्षा बैठक के लिए पार्टी कार्यालय पर जमा हुए। पार्टी हाईकमान की ओर से बनाई गई समिति के सदस्य राजेन्द्र शर्मा, अश्विनी तोमर और जैनेन्द्र नरवार के सामने रालोद वालों ने हार के कारणों पर माथापच्ची की। कमेटी के सदस्यों ने सवाल दागे तो जवाब देने के लिए रालोद नेता भी बेबाकी से आगे आए। कुल मिलाकर निचोड़ निकला कि विधानसभा चुनाव में मिली हार को पीछे छोड़ते हुए रालोद लोकसभा चुनाव की ओर मजबूती के साथ कदम बढ़ाएगी। खासतौर पर सभी धर्म और जातियों को साथ लेकर चलने के मुद्दे पर रालोद नेताओं में सहमति बनती नजर आई। यह भी तय किया गया कि आने वाले समय में रालोद पर लगा ‘जाटों की पार्टी’ का ठप्पा हटाने का प्रयास भी किया जाएगा।
विधानसभा चुनाव में रालोद और समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन हुआ था। गठबंधन में रालोद को चुनाव लडऩे के लिए 33 सीटों मिली थीं। रालोद ने अपने हिस्से में आई सीटों पर मजबूत प्रत्याशी उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। इसके बावजूद भी पश्चिमी यूपी की मात्र आठ सीटों पर ही रालोद के कैंडिडेट जीत दर्ज कर पाए थे। गाजियाबाद जनपद की पांच में से तीन सीटों पर रालोद के प्रत्याशी हैंडपंप के सिंबल पर चुनाव लड़े थे। तीनों सीटों मुरादनगर, मोदीनगर ओर लोनी में रालोद प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा था। उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम के बाद अपेक्षित सीटें नहीं मिल पाने की वजह से रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने उत्तर प्रदेश में संगठन की सभी ईकाईयों को भंग कर दिया था। पार्टी हाईकमान ने पार्टी के वरिष्ठ नेता राजेन्द्र शर्मा, अश्विनी तोमर और जैनेन्द्र नरवार की एक समिति हार के कारणों की समीक्षा करने के लिए बनाई थी। समिति को उन सभी विधानसभा सीटों पर जाकर हार के कारणों की समीक्षा करनी थी जिनपर रालोद के कैंडिडेट खड़े हुए थे। शनिवार को तीन सदस्यों वाली यह कमेटी गाजियाबाद पहुंची और पार्टी कार्यालय पर बैठक की। बैठक के दौरान मौजूद रहे तमाम रालोद नेताओं से चुनाव में रही कमियों और खामियों बारे में कमेटी के सदस्यों ने जानकारी प्राप्त की। बैठक के दौरान तमाम रालोद नेताओं ने अपने विचार समिति के सामने रखे। निचोड़ निकाला गया कि पार्टी पर जाटों का ठप्पा लगने का नुकसान हुआ है। कहीं ना कहीं इसका खमियाजा भी पार्टी के प्रत्याशियों को भी भुगतना पड़ा है। सभी नेता एक बात पर सहमत होते हुए नजर आए कि आने वाले समय में सभी जाति और धर्म के लोगों का समावेश करने से ही बात बन पाएगी। इसके लिए सभी जाति और धर्मों के लोगों को आदर और सम्मान के साथ पार्टी में जगह देनी होगी। ऐसा करने पर ही पार्टी आगे बढ़ पाएगी। लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को सभी को साथ लेकर चलना होगा। इस ठप्पे को हटाना होगा कि रालोद जाटों की पार्टी है। जल्द ही तीन सदस्यीय समिति समीक्षा की रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष जयंत चौधरी को सौंपेगी।