युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद के एसएसपी के निलंबन के पीछे भले ही कई कारण बताए जा रहे हो लेकिन प्रदेश सरकार के इस फैसले से आम जनता और पुलिस विभाग स्तब्ध है। निलंबन की खबर आते ही आम लोगों और पुलिस विभाग में इस बात की चर्चा शुरू हो गई कि एक ईमानदार अफसर भ्रष्टïाचारी व्यवस्था का शिकार बन गया है। एसएसपी पद का चार्ज लेते ही पवन कुमार ने कानून व्यवस्था और गाजियाबाद की पुलिसिंग में बदलाव करने की मुहिम शुरू की थी। उन्होंने थानों की नियुक्ति में पारदर्शिता लानेे के लिए कई कदम उठाए। चौकियों से लेकर ऊपर तक तैनात पुलिसकर्मी और अधिकारियों पर नजर बनाए रखने के लिए कई ठोस पहल की। भ्रष्टïाचार पर लगाम और पुलिसिंग में सुधार लाने के लिए चौकी और थानेदारों की खबर लेते रहे। उनकी इन्हीं मुहिम के चलते पुलिस विभाग में ही कई विरोधी बन गए जो समय-समय पर उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाते रहे। यह सही है कि चुनाव परिणाम के दिन राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल, मेयर आशा शर्मा और कई भाजपा नेताओं को पुलिस ने मतगणना केंद्र तक जाने से रोक दिया और इसकी शिकायत लखनऊ तक की गई लेकिन एसएसपी पवन कुमार ने पूरे वाक्ये के दौरान कानून और नियम पर अडिग रहे। नियम बनाया गया था कि मतगणना स्थल से दो सौ मीटर की दूरी पर सभी कार्यकर्ताओं को रोका जाएगा। इसी नियम के तहत भाजपा नेताओं को रोका गया था। पूरे घटनाक्रम के दौरान निलंबित एसएसपी पवन कुमार ने नियमों को भंग होने नहीं दिया। आज आम लोगों और पुलिस विभाग में चर्चा है कि नियमों की रक्षा करने और पुलिस विभाग में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एसएसपी पवन कुमार को सस्पेंड कर दिया। पुलिस विभाग में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि कानून और नियमों की रक्षा करने, भ्रष्टïाचार को रोकने और पुलिसिंग में सुधार के लिए अगर निलंबन की सजा मिलेगी तो आने वाले समय में पुलिस अधिकारी किस तरह अपनी जिम्मेदारियों को निभा पाएंगे। वे तो फिर सत्ताधारी दल के नेताओं के भोंपू बनकर रह जाएंगे। यह ठीक है कि पवन कुमार के साथ सत्ताधारी नेताओं के बीच तालमेल नहीं रहा लेकिन उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में कही भी कोई कोताही नहीं बरती है। जिस दिन पवन कुमार ने चार्ज संभाला था, उसी दिन आरडीसी में एक लूट हो गई थी, महज एक सप्ताह में उस लूट का खुलासा हो गया था। पेट्रोल पंपकर्मी से पच्चीस लाख रुपए की लूट के मामले में भी पुलिस खुलासे के करीब पहुंच गई थी। लेकिन पुलिस महकमे के ही कुछ लोगों ने उच्च अधिरी और सरकार को ऐसी सूचनाएं दी कि गाजियाबाद में अपराध की बाढ़ सी आ गई है। सूत्रों के अनुसार, आईपीएस अधिकारी पवन कुमार गाजियाबाद में पोस्टिंग चाह नहीं रहे थे। गाजियाबाद से पहले वे मुरादाबाद के एसएसपी थे। उन्होंने अक्टूबर में यूएनओ में डेपुटेशन पर भेजे जाने की गुजारिश की थी।