नगर संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। गाजियाबाद जिले के तहत आने वाली साहिबाबाद विधानसभा को देश की सबसे बडी विधानसभा में से एक माना जाता है। लेकिन बात करें अगर वोटिंग प्रतिशत की, तो इस विधानसभा के वोटर्स वोटिंग के मामले में सबसे पीछे रह जाते हैं। बात चाहे लोकसभा चुनावों की हो या फिर विधानसभा चुनावों की, हर वोटिंग में साहिबाबाद क्षेत्र के वोटर्स सबसे पीछे रह जाते हैं। बात करें अगर २०२२ के विधानसभा चुनावों की, तो साहिबाबाद विधानसभा में वोटर संख्या १० लाख २० हजार ३८६ थी, लेकिन वोट करने के लिए मतदान केन्द्रों पर पहुंचे थे महज ४ लाख ७९ हजार ८९३ मतदाता।
यहां का वोटिंग प्रतिशत अन्य विधानसभा के मुकाबले सबसे कम ४७.०३ फीसदी रहा। जबकि लोनी विधानसभा में ६१.४९ वोटिंग प्रतिशत था। मुरादनगर में ५९.७२, गाजियाबाद सीट पर ५१.५७ और मोदीनगर सीट पर ६७.२६ फीसदी वोटर्स ने अपने मतदान का प्रयोग किया था। ओवर ऑल पांचों विधानसभा का वोटिंग परर्सेंटेज महज ५४.९२ फीसदी रहा था। अब बात करें लोकसभा चुनाव में साहिबाबाद विधानसभा की तो पिछले लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा की स्थिति कुछ अच्छी नहीं रही। २०१९ के लोकसभा चुनाव में साहिबाबाद विधानसभा में महज ४९.५७ फीसदी ही वोटर्स ने वोट किया था। जबकि उसके मुकाबले धौलाना से सबसे अधिक ६५.६७ फीसदी वोट पडा था। वर्ष २०१४ में साहिबाबाद में ५२.३३ फीसदी ही वोट डले थे।
उस दौरान साहिबाबाद विधानसभा में वोटर संख्या १० लाख से अधिक थी। इस बार फिर साहिबाबाद क्षेत्र में वोटिंग प्रतिशत बढाने के लिए जिला निर्वाचन कार्यालय जुटा हुआ है। हाईराइज सोसायटी के लोग वोट डाल सके इसके लिए ३५ अतिरिक्त मतदेय स्थल की उनकी सोसायटी में ही बनाए गए हैं ताकि उन्हें सोसायटी से बाहर न जाना पडे और लाइनों में भी न लगना पडे।
साहिबाबाद विधानसभा का यह हाल तब है जहां सबसे अधिक वोटर संख्या होने के साथ-साथ पढी लिखी आबादी है। यहां पर बडी संख्या में ऐसे लोग भी रहते हैं जो दिल्ली सहित अन्य शहरों में कार्यरत हैं, लेकिन निवासी वह गाजियाबाद के हैं, मतदान का अवकाश मिलने के उपरांत भी यहां के वोटर्स वोट डालने के बजाए घूमने फिरने के लिए हिल स्टेशनों पर निकल जाते हैं। इसके कारण जिले का वोटिंग प्रतिशत हर चुनाव में कम हो रहा है। इस क्या अतिरिक्त मतदान केन्द्र और जागरूकता अभियान कामयाब हो पाएंगे यह चुनाव के बाद ही पता चल सकेगा।