लोकसभा चुनाव-२०२४
देश के आम चुनावों के लिए कल सातवें एवं अंतिम चरण में मतदान होगा। कल के मतदान के बाद चार जून को दिल्ली की सत्ता पर कौन काबिज होगा, जनता किसको दिल्ली की सत्ता सौंपेगी इसका फैसला भी सबके सामने आ जाएगा। अभी तक केवल और केवल आंकड़ेबाजी और दावे ही किये जा रहे हैं कि हम सत्ता में आ रहे हैं। दावा करने वाले ये भूल रहे हैं कि जनता की अदालत सबसे बड़ी अदालत है और उसी का फैसला आखिरी फैसला होता है। 2014 से देश में केंद्र में मोदी की सरकार है और इस बार भी मोदी पूरे कॉन्फिडेंस के साथ हैट्रिक लगाने का दावा कर रहे हैं। इंडिया गठबंधन भी पूरी मुस्तैदी के साथ दावे कर रही है कि मोदी का जमाना गया अब इंडिया गठबंधन की सरकार बनने जा रही है। अब चार जून को पता चलेगा कौन कितने पानी में है और किसके दावों में कितना दम है, लेकिन एक बात जरूर इस बार आम चुनाव में देखने को मिली जो ना २०१४ में थी और ना ही २०१९ में थी। इस बार २०२४ में स्थानीय मुद्दे और जातिगत राजनीति अन्य चुनावों से ज्यादा हावी रही और २०२४ चुनावी परिणाम देश की राजनीति किस ओर जा रही है इसका आईना दिखाएंगे। यदि जाति और स्थानीय मुद्दे ही हावी रहे तो इस बार २०२४ के चुनाव के परिणाम बहुत ही चौंकाने वाले होंगे। साथ ही प्रत्याशियों से निजी नाराजगी और हाईकमान द्वारा दिये गये टिकट कितने सही थे कितने गलत थे ये भी तय होगा। इसीलिए इस बार के चुनाव देश की दिशा और दशा दोनों तय करेंगे। सरकार किसकी बनती है किसकी नहीं बनती ये अलग विषय है। लेकिन जनता का मूड क्या है और जनता किस तरह की राजनीति चाहती है ये भी २०२४ के परिणाम तय करेंगे। इसमें भी कोई दो राय नहीं कि जातियों के आधार पर कुर्सी हासिल करने वाले और राजनीति करने वाले नेताओं का भविष्य भी ये चुनाव तय करेंगे। चाहे भाजपा की बात हो या फिर इंडिया गठबंधन के नेताओं की बात हो सभी ने जातीय आधार पर राजनीति की है वो कितनी सफल होगी ये भी तय होगा। हालांकि भले ही लोग जाति की राजनीति को गलत मानते हो लेकिन कोई चुनाव भी ऐसा नहीं है जो जातिगत आधार पर नहीं लड़ा गया हो। लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम इस बात का भी फैसला करेंगे कि जनता धर्म की राजनीति करने वालों को करारा जवाब देती है या नहीं देती है यदि परिणाम चौंकाने वाले होते हैं तो फिर ये बात साफ होगी कि देश की जनता धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों से ऊब चुकी है और वो केवल और केवल विकास की राजनीति करने वालों के साथ है। बहरहाल, कल के बाद हर पल राजनेताओं को चार जून तक कभी सांसें तेज करेगा तो कभी धडक़ने तेज करेगा क्योंकि मतदान प्रतिशत और गर्मी के साथ -साथ इस प्रत्याशियों से नाराजगी के चलते कोई भी कॉन्फिडेंस के साथ नहीं कह रहा है। कि वो जीत रहा है। सभी कह रहे हैं कि मामला फंसा हुआ है।
जय हिंद