युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में सपा-सरकार में सबसे अधिक अनुसूचित जाति-जनजाति के फर्जी प्रमाणपत्र बनाए गए थे। सबसे अधिक एक्ट का दुरूपयोग भी इन्हीं पार्टी की सरकारों में हुआ था। यह कहना है उत्तर प्रदेश एससी-एसटी आयोग के उपाध्यक्ष रामनरेश पासवान का। प्रेसवार्ता में आयोग के उपाध्यक्ष ने प्रदेश की पूर्व सरकारों जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इसी सरकार की देन है कि एक महिला फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे विधायक बन गई। एक डीएसपी, एक एसडीएम तो एक बीएचयू में प्रोफेसर बन गया और अब इन सब मामलों की जांच चल रही है। प्रदेश में ऐसे हजारों फर्जी प्रमाणपत्र हैं, जिनकी जांच आयोग से लेकर प्रशासन स्तर पर जिले वार कराई जा रही है, जिससे पता चल सके कि कितने लोग फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे सरकारी सेवाओं में बैठे हैं। जिले में भी एक प्रधान के फर्जी प्रमाणपत्र का संदेह होने पर उसकी जांच चल रही है। उपाध्यक्ष ने बताया कि फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच के लिए तीन स्तर पर कमेटी गठित की गई है। पहली कमेटी जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में, दूसरी मंडल स्तर पर कमिश्नर और तीसरे शासन स्तर पर प्रमुख सचिव स्तर पर गठित की गई है। इतना ही नहीं इनसे सम्बंधित शिकायतों का निस्तारण भी डीएम को ३० दिन और कमिश्नर को ९० दिन में हर हाल में करके देना होगा। अगर इसमें देर हुई तो सम्बंधित अधिकारी की जवाबदेही होगी। इसके अलावा जिस भी अधिकारी के हस्ताक्षर से फर्जी प्रमाणपत्र बनाया गया होगा उस अधिकारी के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। कल देर शाम को आयोग के उपाध्यक्ष ने जिले में बालिका-बालक छात्रावास का निरीक्षण भी किया, जहां कमियां पाए जाने पर जल्द से जल्द उन्हें दूर कराने के निर्देश जिला समाज कल्याण अधिकारी को दिए।