संगठन की दृष्टिï से भारतीय जनता पार्टी में क्षेत्रीय अध्यक्ष बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण पद है। बूथों और मंडलों के अध्यक्ष, उनकी कमेटी आदि बनाने से लेकर चुनाव में प्रत्याशी चयन तक में क्षेत्रीय अध्यक्ष की बड़ी भूमिका होती है। इस पद की जितनी महत्ता है यह उतना ही शालीन माना जाता है। इस समय भाजपा के पश्चिम क्षेत्र के अध्यक्ष सतेन्द्र शिशौदिया हैं। यह संगठन के मंझे हुए खिलाड़ी हैं, बड़ा लंबा अनुभव इनके पास है। सतेन्द्र शिशौदिया के पास जितना अनुभव है यह उतने ही शालीन भी माने जाते हैं, स्वभाव भी अच्छा और मधुर रहता है। लेकिन इन्होनें क्षेत्रीय अध्यक्ष पद पर एक ऐसी परंपरा शुरू कर दी है जिसकी चर्चा भाजपा के आम कार्यकर्ता भी करने लगे हैं। लोग कह रहे हैं कि उन्होंने राजकुमार त्यागी, लज्जारानी गर्ग, भूपेन्द्र चौधरी, अश्वनी त्यागी, मोहित बेनीवाल आदि कई क्षेत्रीय अध्यक्ष देखें हैं। मगर उनमें से किसी के पास कभी कोई सरकारी या प्राइवेट सुरक्षाकर्मी नहीं देखा। लेकिन सतेन्द्र शिशौदिया एक नहीं तीन सुरक्षाकर्मियों के घेरे में रहते हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि उनकी गाड़ी के साथ एक और गाड़ी चलती है जिसमें पार्टी के कुछ कार्यकर्ता रहते हैं और उनके पास भी हथियार देखें जाते हैं। हालांकि हम इस बात की पुष्टिï नहीं करते, लेकिन राजनीति में चर्चाओं का बउ़ा महत्व रहता है। अब सतेन्द्र शिशौदिया को लेकर ऐसी चर्चाएं चल रही हैं तो कहीं ना कहीं कुछ तो बात रही ही होगी। भाजपा के कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं कि आखिर क्षेत्रीय अध्यक्ष को सरकारी सुरक्षा लेने की जरूरत ही क्या पड़ गई। क्योंकि जिस तरह का उनका व्यवहार रहा है उस लिहाज से भी इसे उचित नहीं माना जा रहा है। जबकि इससे पहले के किसी क्षेत्रीय अध्यक्ष ने सुरक्षा कर्मी नहीं लिया। सुरक्षा कर्मियों को लेकर कहा जा रहा है कि उन्होंने संगठन में एक नई परंपरा की शुरूआत कर दी है। क्षेत्रीय कमेटी घोषित नहीं करने, मंडल अध्यक्षों की सूची जारी नहीं करने आदि को लेकर भी भाजपा में अंदखाने सवाल उठाए जाने लगे हैं।