नई दिल्ली। संविधान दिवस के मौके पर संसद में आयोजित कार्यक्रम का विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया। विपक्षी दलों के शामिल न होने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम किसी दल का नहीं था। उन्होंने बिना नाम लिए कांग्रेस पर हमले किए। इस कार्यक्रम को राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति व लोकसभा स्पीकर ने भी संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह कार्यक्रम किसी राजनैतिक दल का नहीं था। किसी प्रधानमंत्री का नहीं था। यह कार्यक्रम स्पीकर पद की गरिमा थी। हम संविधान की गरिमा बनाए रखें। महात्मा गांधी ने आजादी के आंदोलन में अधिकारों के लिए लड़ते हुए भी देश को कर्तव्यों के लिए तैयार करने की कोशिश की थी। वे स्वदेशी, आत्मनिर्भर भारत का विचार लाए थे। मोदी ने कहा कि विपक्षी के आचरण से संविधान की भावना को चोट पहुंची है। इसकी एक-एक धारा को चोट पहुंची है। जो दल लोकतांत्रिक कैरेक्टर खो चुके हों, वो लोकतंत्र की रक्षा कैसे कर सकते हैं। एक राजनीतिक दल, पार्टी- फॉर द फैमिली, पार्टी- बाय द फैमिली… आगे कहने की जरूरत नहीं लगती।  लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि हमारे प्रगतिशील संविधान को देश विदेश हर जगह सम्मान की दृष्टि व प्रेरणा के श्रोत के रूप में देखा जाता है। कांग्रेस समेत 14 विपक्षी दलों ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया है। संविधान दिवस के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बिना किसी का नाम लिए विपक्ष को बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कई ट्वीट कर ना सिर्फ लोगों को संविधान दिवस के महत्व के बारे में बताया है, बल्कि इस बात पर भी जोर दिया है कि विचारधारा के मतभेद जनसेवा में कभी भी बाधा नहीं बनने चाहिए। वे कहते हैं कि विचारधारा में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन कोई भी मतभेद इतना बड़ा नहीं होना चाहिए कि वह जन सेवा के वास्तविक उद्देश्य में बाधा बने। सत्ता-पक्ष और प्रतिपक्ष के सदस्यों में प्रतिस्पर्धा होना स्वाभाविक है। लेकिन यह प्रतिस्पर्धा बेहतर प्रतिनिधि बनने और जन-कल्याण के लिए बेहतर काम करने की होनी चाहिए। तभी इसे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा माना जाएगा। संसद में प्रतिस्पर्धा को प्रतिद्वंद्विता नहीं समझा जाना चाहिए।