लोकसभा में शपथ
कल लोकसभा में जो कुछ हुआ उसकी शायद ही किसी ने उम्मीद की होगी। संविधान को साक्षी मानकर शपथ लेने वाले कई सांसदों ने जिस तरह शपथ के दौरान नई चीजें जोड़ीं ऐसा आज तक कभी नहीं हुआ। संविधान की बात करने वाले एआईएएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शपथ की समाप्ति पर जय भीम, जय भीम और जय फिलिस्तीन का नारा लगाया तो बरेली के सांसद ने जय हिंदू राष्टï्र का नारा दिया। गाजियाबाद के सांसद अतुल गर्ग ने शपथ के अलावा कुछ शब्द कहे, लेकिन वो ऐसे शब्द नहीं थे जिससे किसी की भावना को ठेस पहुंची हो। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी, श्यामा प्रसाद जी, मोदी जी, डॉ. हेडगेवार की जय की। चलिये ये सब देशवासी हैं। हालांकि संविधान में इसकी इजाजत नहीं है। शपथ संविधान के हिसाब से ली जाती है। वैसे अतुल गर्ग ने अपने पिताश्री दिनेश गर्ग को हाऊस में भी याद किया। ये अपने आप में नया था। हर सांसद को चाहिये कि वह अपनी विरासत को याद रखे। जैसे अतुल जी ने रखा, लेकिन फिलिस्तीन जिंदाबाद और हिंदूराष्टï्र जिंदाबाद की बात करने वाले सांसदों के खिलाफ जरूर कार्यवाही होनी चाहिए। क्योंकि यह सीधा-सीधा संविधान का उल्लंघन है। इनका निर्वाचन रद्द होना चाहिए। जिस देश में रह रहे हैं उस देश को जिंदाबाद करना चाहिए। जय भीम में भी कोई एतराज नहीं है, लेकिन इसको अगर बाबा साहेब अम्बेडकर की जय कहा जाता तो और अच्छा होता। क्योंकि वो संविधान लिखने वाले थे, उनकी जय में किसी को कोई एतराज नहीं होता। आखिरकार जय फिलिस्तीन और जय हिंदूराष्टï्र यह बोलकर क्या साबित करना चाहते थे। यही ओवैसी संविधान की दुहाई देते हैं कि देश संविधान से चलता है। यही ओवैसी संविधान को लेकर सरकार को घेरते हैं तो फिर किस संविधान में लिखा है कि अपने देश में रहकर लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में आप अपने देश के बदले किसी दूसरे देश की जय बोलें। आप फिलिस्तीन में हो रहे जुल्म का मुद्दा संयुक्त राष्टï्र में उठा सकते हैं, लेकिन जिस संविधान की शपथ ले रहे हैं, जिस देश में रह रहे हैं उस देश में दूसरे देश को जिंदाबाद कैसे कह सकते हैं। इस तरह की चीजें ही एक नई बहस को मुद्दा देती हैं। लोकतांत्रिक देश में हिंदूराष्टï्र की जय बोलकर सांसद क्या संदेश देना चाहते हैं। इसलिए ऐसे बड़बोले सांसदों के खिलाफ सख्त कार्यवाही हो ताकि देश संविधान के तहत चले और हमारा लोकतंत्र और मजबूत हो।
जय हिन्द