युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा में जमीन घोटाले, भूमि अधिग्रहण के दौरान हुए घोटालों की परतें खुल रही हैं, जिसकी आंच कई अधिकारियों तक पहुंची है। ग्रेटर नोएडा के दादरी के गांव चिटहैरा में अरबों के जमीन घोटाले की परतें भी अब खुलने लगी हैं। हालांकि यह घोटला अब खुलना शुरू हुआ है, लेकिन वर्ष २००६ में तत्कालीन डीएम रहे व वर्तमान में केन्द्र सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे वरिष्ठ आईएएस संतोष कुमार यादव ने उस समय इन २८३ पट्टों को रद्द कर दिया था। निर्धन भूमिहीनों को दिए जाने वाले पट्टे आर्थिक रूप से सम्पन्न अपात्र लोगों को दे दिए गए थे, लेकिन संतोष कुमार यादव ने मामले की जांच कर पट्टों को न सिर्फ रद्द किया था, बल्कि जमीन से पट्टेधारकों के नाम हटाकर ग्राम समाज के नाम दर्ज करा दी गई थी। उन्होंने मामले की जांच तात्कालीन एडीएम एलए अजय सिंह से कराई थी। इसमें पाया गया था कि सभी २८३ पट्टे नियमों को ताख पर रखकर किए गए है, पट्टा आवंटन में नियमों का पालन नहीं किया। पट्टे उन लोगों को किए जाने का प्राविधान है, जो गांव के मूल निवासी होने के साथ निर्धन और भूमिहीन है। यदि परिवार के एक सदस्य के पास भी पहले से जमीन है, तो उसे सरकारी जमीन का पट्टा नहीं हो सकता, लेकिन यहां नियमों का उल्लंघन कर अपात्रों को पट्टे दे दिए गए। संतोष यादव ने इसे सरकारी जमीन की लूट मानते हुए पट्टों को रद्द कर अभिलेखों में ग्राम समाज के नाम जमीन करा दी। इसके बाद यूपीसीडा ने जमीन का पुर्नग्रहण कर जिला प्रशासन को मुआवजे की रकम का भुगतान कर दिया। जमीन का कुछ हिस्सा एचसीएल को आवंटित कर दिया गया। एचसीएल ने भी जमीन के मुआवजे की रकम का भुगतान प्रशासन को कर दिया था। हैरानी की बात यह है कि पुनग्र्रहण के बाद जमीन को संक्रमणीय घोषित कराकर भूमाफियों ने पट्टेधारकों से जमीन अपने परिचितों के नाम करा ली। राजस्व अभिलेखों में लेखपाल, कानूनगों व तहसीलदार से सांठगांठ कर प्राधिकरण से मुआवजा भी उठा लिया। प्राधिकरण डीएमआईसी के लिए जमीन क्रय की थी। तालाब की जमीन पर अब मिट्टी का भराव कराकर अवैध कॉलोनी काटी जा रही हैं। दादरी के समीप होने की वजह से जमीन २० से ३० हजार रुपए प्रतिवर्ग मीटर बिक रही है, इस जमीन की कीमत भी अरबों में है।