युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद/बिजनौर। करे कोई भरे कोई, वाली कहावत बिजनौर जनपद में तैनात दरोगा अरुण कुमार राणा के ऊपर पूरी तरह से उस समय सटीक बैठती दिखाई दी जब इस जिले के पुलिस प्रशासन ने दरोगा पर १५ जुलाई को हमला बोलने वाले आरएसएस के कार्यकर्ता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके आरोपित के खिलाफ कोई कार्रवाई करने के बजाय पहले तो उन्हें ही लाइन हाजिर कर दिया और फिर कप्तान ने उन्हें निलंबित भी कर दिया। उक्त घटना के बाद पुलिस के उच्च अधिकारियों द्वारा अपनाये गये उदासीन एवं पक्षपातपूर्ण रवैये से आहत दरोगा अरूण कुमार ने जैसे ही अपना इस्तीफा एसएसपी को सौंपा, पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। इसके बाद बिजनौर पुलिस के आला अफसरों की किरकिरी उस समय हुई जब दरोगा द्वारा दिया गया त्यागपत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो क्लिप में पीडि़त दरोगा अरूण कुमार राणा ना केवल पूरी तरह से आहत एवं भाव-विहï्ल दिखाई दिए बल्कि त्यागपत्र देने की वजह उन्होंने पुलिस के आला अफसरों के पक्षपातपूर्ण रवैये को बताया।