प्रमुख संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। कहते हैं कि अगर अपने ही कुछ नेता पुलिस की हां में हां मिलाने लगे तो फिर आंदोलन अपने आप ही हल्का पड़ जाता है। कल कुछ ऐसा ही हुआ जब कविनगर थाने में रालोद के नेताओं ने हंगामे के बाद धरना दिया तो फिर कुछ बड़े नेता अंदरखाने पुलिस अधिकारियों को आश्वासन देते रहे कि कोई बात नहीं है हम बैठे हैं, थोड़ी देर में धरना समाप्त करा देंगे और यही हुआ भी। हालांकि रालोद के कई नेता वास्तव में कार्रवाई के पक्ष में थे और उसका असर भी दिखाई दिया। अगर महानगर अध्यक्ष रेखा चौधरी की बात की जाए तो उन्होंने पूरे आंदोलन को बड़ी मजबूती के साथ उठाया, लेकिन वहीं जो बड़े नेता हैं जो हमेशा अफसरों के संपर्क में रहते हैं, ऐसे नेताओं ने जरूर पुलिस अफसरों की बात में हां में हां मिलाकर अपने नंबर बढ़ाने की कोशिश की। दरअसल गुरु गोविंद सिंह के साहबजादों के बलिदान दिवस पर संघ द्वारा निकाले जा रहे बाल पथ संचालन के दौरान विवाद हो गया था। आरोप था कि रालोद के एक नेता के परिजनों ने साथियों के साथ मिलकर संघ के कुछ बच्चों को बंधक बना लिया था। इसके बाद पुलिस ने मामले को शांत कराया, लेकिन आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने हंगामा खड़ा कर दिया और इसकी सूचना पाकर विधायक और भाजपा नेता भी पहुंच गए थे।
बताते हैं कि रालोद के नेता अरविंद तेवतिया और उनके बेटे को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसको लेकर रालोद के नेताओं ने कविनगर थाने में हंगामा किया। इस बीच कविनगर में रालोद के नेता धरने पर बैठ गए, लेकिन सूत्रों ने बताया कि रालोद के कुछ बड़े नेता धरने को मैनेज करने में जुट गए और उन्होंने पुलिस को आश्वासन दिया कि हम सब खत्म करा देंगे। लेकिन लोकदल के कुछ नेता संघ के खिलाफ कार्रवाई पर अड़ गए। बहरहाल यदि लोकदल के नेता धरने को मैनेज नहीं करते तो शायद अरविंद तेवतिया या उनका परिवार जेल नहीं जाता। वहीं आज भी लोकदल के कुछ नेता अंदरखाने पुलिस अधिकारियों के संपर्क में हैं और आगे कोई कार्रवाई ना हो, रालोद कोई धरना-प्रदर्शन ना करें इसको लेकर अपने ही संगठन के पदाधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं।