युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। सोमवार को आस्था के महापर्व छठ पूजा का आरंभ नहाय खाय के साथ हो गया। व्रतियों द्वारा सूर्य को अघ्र्य देने के लिए हिंडन नदी घाट सहित अन्य अस्थाई घाटों पर परिजनों द्वारा पूजा वेदी बनाया जाना शुरू हो गया है। इतना ही नहीं बड़ी संख्या में हिंडन नदी घाट पर पूर्वांचली समाज के लोगों ने पहले हिंडन घाट की सफाई की। वहीं नगर निगम द्वारा घाट पर अघ्र्य देने के लिए बेरिकेट्स लगाई जा रही हैं। लेकिन अभी भी नदी में पानी कम होने से लोगों में निराशा है।
अकेले हिंडन नदी घाट पर ही सैंकड़ों की संख्या में पूजा वेदी बनाई जा रही हैं। इसके अलावा अन्य स्थानों पर गड्ढे तैयार किए जा रहे हैं ताकि व्रती वहां सूर्य को अघ्र्य दे सकें। मिट्टी और ईंटों को मिलाकर नदी के जल से इन पूजा वेदियों को तैयार किया जा रहा है। सूर्य को अघ्र्य देने के उपरांत व्रती रात भर इन वेदी पर पूजन करती हैं व छठी मैया के भजनों को गाया जाता है। प्राकृतिक वस्तुओं से इन पूजा वेदियों को तैयार किया जाता है। १० नवंबर को पहला अघ्र्य दिया जाएगा। इसके बाद अधिकतर व्रती घाट पर ही प्रवास करते हैं और अगले दिन सुबह उगते सूर्य को अघ्र्य देकर व्रत संपन्न किया जाता है। सोसायटियों में अस्थाई रूप से छोटे तालाब, टब आदि का प्रबंध किया जा रहा है। कोरोना को देखते हुए सोसायटियों में विशेष व्यवस्था की जा रही है। वहीं कॉलोनियों के पार्कों में अस्थाई गड्ढे तैयार किए जा रहे हैं जिसमें अघ्र्य देने के लिए पानी भरा जाएगा ताकि इनमें खड़े होकर व्रती सूर्य को अघ्र्य दे सकें। हालांकि, नदी व उसके आसपास सफाई व्यवस्था को लेकर पूर्वांचलियों में रोष है। अभी तक हिंडन नदी में अघ्र्य देने के लिए साफ व पर्याप्त पानी भी नहीं है। हालांकि, व्रतियों के परिजनों ने आज सुबह भी घाट पर सफाई की और पूजन वेदी तैयार की।