युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। लगातार हो रही उपेक्षा से नाराज पंजाबी समाज ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा के लिए चिंता बढ़ा दी है। पंजाबी समाज के खास लोगों, जिनमें भाजपा के कई बड़े नेता भी शामिल हैं, ने आज प्रेसवार्ता कर स्पष्टï रूप से कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में जो भी पार्टी उनके समाज को मान-सम्मान और टिकट देगी, समाज के लोग उनका समर्थन करेंगे।
अपनी राजनीतिक भागेदारी बढ़ाने और सरकार और संगठन में समाज के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के उद्देश्य से पंजाबी समाज के कुछ लोगों ने पंजाबी महासभा गाजियाबाद का गठन किया है। इस संगठन की ओर से आज बुलाई गई प्रेसवार्ता में वक्ताओं ने कहा कि आजादी के बाद बंटवारे में हजारों पंजाबी गाजियाबाद आकर बस गए थेे। पंजाबी समाज से सरदार तेजा सिंह तीन बार विधायक बने। वे बेहद सरल थे। विधायक बनने के बाद भी साइकिल से चला करते थे। इसके बाद पंजाबी समाज को हाशिए पर डाल दिया गया।
पंजाबी महासभा के अध्यक्ष देसराज देसी ने कहा कि गाजियाबाद विधानसभा क्षेत्र में चार लाख सत्तर हजार वोटर्स है। इनमें से लाइनपार क्षेत्र में तीन लाख और शहरी क्षेत्र में डेढ़ लाख वोटर्स है। उन्होंने कहा कि जिस समाज को बार-बार टिकट दिया जाता है और जो यह दावा करता है कि यहां उनकी आबादी सबसे ज्यादा है, उससे ज्यादा वोटर्स पंजाबी समाज के है।
उन्होंने चुनौती दी कि ऐसा कोई पांच मोहल्लों के नाम बता दें जहां उस समाज के नाम से जाना जाता है। उन्होंने ऐसे पांच मोहल्लों के नाम बताए जो पंजाबियों के कारण जाने जाते हैं। भाजपा नेता व संरक्षक मंडल के सदस्य जगदीश साधना ने कहा कि जिले में पंजाबियों की आबादी साढ़े तीन लाख है लेकिन संगठन और सरकार में उनको प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। उन्होंने कल पंजाब में प्रधानमंत्री के काफिले को रोके जाने की घटना की निंदा की है। महासभा के संरक्षक महेश आहूजा ने कहा कि आजादी के बाद गाजियाबाद में पंजाबियों को जो सम्मान मिलना चाहिए वो नहीं मिला। पंजाबी समाज पिछलग्गू बनकर रह गया है। लेकिन अब वह पिछलग्गू नहीं रहेगा। अब उसे समर्थन देगा जो समाज को सम्मान और मान देगा।
देसराज देसी ने कहा कि समाज की ओर से सर्वे किया गया जिसमें अनुसूचित जाति, मुस्लिम, ब्राह्मïण के बाद सबसे ज्यादा संख्या में वोटर्स पंजाबी है। गाजियाबाद के विकास में पंजाबियों की बड़ी भूमिका रही है लेकिन पंजाबियों को मान सम्मान नहीं दिया गया। भाजपा के बीस मंडलों में एक भी मंडल अध्यक्ष पंजाबी नहीं है। कहीं बोर्ड के चेयरमैन पंजाबी नहीं है। वार्ड चेयरमैन तक नहीं है। संगठन में कोई पद नहीं दिया गया। सिर्फ बलदेवराज शर्मा को राज्यमंत्री पद दिया गया। अशोक मोंगा को भी ज्यादा महत्व का पद नहीं दिया गया।