प्रमुख संवाददाता
गाजियाबाद। १९ दिसंबर को गाजियाबाद में विराट वैश्य व्यापारी महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है। हालांकि, अभी तक इसका कोई बैनर तय नहीं है लेकिन तैयारियां भाजपा के नेता ही कर रहे हैं। विराट वैश्य व्यापारी महाकुंभ के नाम से ये बात तो तय हो गई कि व्यापारी भी अब व्यापारी ना रहकर जातियों में बंट गए जबकि व्यापारी व्यापारी ही होता है। चाहे वो वैश्य समाज का हो, पंजाबी समाज का हो या किसी भी समाज का हो, व्यापारी को व्यापारी के नाम से ही जाना जाता है। लेकिन चुनावी माहौल है, भाजपा सत्ता में है, कुछ भी हो सकता है। अब वैश्य भी जो व्यापारी हैं, उनको भी इस आयोजन से दूर रखे जाने को लेकर खूब चर्चाएं हो रही हैं। वहीं अगर भाजपा की अंदरूनी राजनीति की बात की जाए तो यहां पर भी ‘अपनी ढपली-अपना राग’ वाली कहावत चरितार्थ हो रही है।
दरअसल, इस पूरी रणनीति के पीछे एक नहीं भाजपा के कई बड़े नेता लगे हुए हैं। इस कार्यक्रम के बारे में बताया जाता है कि इसमें देश के गृहमंत्री अमित शाह आ सकते हैं। हालांकि, अभी तक अधिकारिक तौर पर उनके आगमन की कोई जानकारी नहीं है लेकिन जो भी आयोजक हैं वो इस बात का दावा कर रहे हैं कि अमित शाह आयेंगे। इस आयोजन के पीछे अहम भूमिका राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल की है। अनिल अग्रवाल की निगाहें २०२४ के लोकसभा चुनाव पर है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि अनिल अग्रवाल वास्तव में जनप्रतिनिधि हैं वो भले ही जनता के वोटों से सांसद नहीं बने हों लेकिन आज भी जनता उनके दरवाजे से निराश होकर नहीं लौटती और जनता के लिये हमेशा उनके दरवाजे खुले रहते हैं। यही कारण है कि भाजपा के कुछ नेता उनकी सक्रियता से अंदरखाने परेशान हैं। १९ दिसंबर के कार्यक्रम को लेकर भी सबसे पहले जो बैठक बुलाई गई थी उस बैठक को बीच में छोड़कर राज्यमंत्री अतुल गर्ग और एमएलसी दिनेश गोयल बीच में से ही चले गए थे।
जाहिर है कि एक मजबूत वैश्य की सक्रियता से उनके समाज के अलावा अन्य नेताओं में भी घबराहट है। बहरहाल कार्यक्रम होने से पहले ही काफी चर्चाओं में आ गया है और कौन स्वागत अध्यक्ष बनेगा, कौन कार्यक्रम अध्यक्ष बनेगा इसको लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। इन दोनों पदों के लिये भी कुछ व्यवस्था की बात भी की जा रही है। जाहिर है जिस मंच पर अमित शाह होंगे उस मंच पर रहने के लिये कोई भी व्यवस्था करने से इंकार नहीं कर सकता।
अब ये महाकुंभ २०२२ में कितना असर दिखाएगा ये तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन क्या वैश्य समाज के सम्मेलन में अन्य व्यापारी संगठन भी बुलाए जाएंगे। क्या वैश्य समाज के अलावा अन्य समाज के नेताओं को भी आमंत्रित किया जायेगा, ये बड़ा सवाल है। चुनाव के समय इस तरह के आयोजन होना अपने आप में कई तरह के संकेत देता है। इस विराट महाकुंभ में दो दर्जन से अधिक जिलों के वैश्य व्यापारी भाग लेंगे। हालांकि कई लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। कमला नेहरू नगर के मैदान में होने वाले इस महाकुंभ के लिये सिटिंग की व्यवस्था की गई है। कुर्सियों की संख्या भी घटाई-बढ़ाई जा रही है ताकि कहीं कुर्सियां खाली ना रह जाये।
बहरहाल, अब इस महाकुंभ की सफलता का सहरा किस-किस के सर बंधेगा, ये देखने वाली बात है। फिलहाल ये सम्मेलन मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र में हो रहा है और पर्दे के पीछे इसमें जो सहयोग कर रहे हैं वो शहर विधानसभा के दावेदार हैं। अब ये आने वाला समय बताएगा कि यदि उनकी विधानसभा बदलती है तो क्या उन्हें इसका लाभ मिलेगा या नहीं क्योंकि राजनीति में नफा नुकसान पहले देखा जाता है। चुनावी मौसम में कोई भी कार्यक्रम हो वो केवल और केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिये ही आयोजित होते हैं।