प्रमुख संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी हो गई है, ेलेकिन अभी कई पार्षदों को उम्मीद है वार्ड का आरक्षण फिर से बदलेगा। इसे लेकर कई पार्षदों की भागदौड़ चल रही है, कई पार्षद सियासी दांवपेच में भी लगे हैं। गत 2 नवंबर को नगर निगम के सभी वार्डों में पार्षद आरक्षण की सूची तैयार की गई थी। इसके पांच दिन बाद 7 नवंबर को फिर नई सूची तैयार कर शासन के पास मंजूरी को भेजा गई है। नई वार्ड आरक्षण की सूची पर शासन की मुहर लगने जा रही है। वहीं दूसरी ओर कई ऐसे पार्षद हैं जिनको उम्मीद है कि तीसरी बार फिर से वार्ड के आरक्षण की सूची तैयार की जाएगी। आरक्षण की दूसरी सूची को लेकर कई ऐसे पार्षद हैं जो सवाल खड़ा कर रहे हैं। कई पार्षदों का तो यहां तक कहना है कि यह सूची निगम अधिनियम पर आधारित नहीं है। कई पार्षद इस सूची को बदलवाने के लिए इसे कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में लगे हैं।
ऐसे भी कई पार्षद हैं जो मान चुके हैं कि आरक्षण की दूसरी सूची में उनके वार्ड को किसी अन्य के लिए आरक्षित कर दिया गया है। ऐसे 54 वार्र्ड हैं जिनमें मौजूदा पार्षद आरक्षण की दूसरी सूची के हिसाब से चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। ऐसे में बीजेपी, कांग्रेस सहित कई पार्टियों के पार्षदों ने हार मान ली है। आरक्षण की पहली सूची के बाद दूसरी सूची को लेकर सभी राजनैतिक दल भी अभी असमंजस में हैं। इन सभी राजनैतिक दलों को भी अभी सरकार द्वारा आरक्षण के नोटिफिकेशन का इंतजार है। अलग-अलग राजनैतिक दलों से वार्ड से चुनाव में प्रत्याशी बनने के लिए लंबी लाइन लगी है। राजनैतिक दल भी प्रत्याशी फाइनल करने के लिए वार्ड आरक्षण के नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे हैं।