गाजियाबाद (युग करवट)। वार्ड के आरक्षण की नई सूची को लेकर कानूनी पेंच फंस सकता है। कई ऐसे पार्षद हैं जो शासन से इस सूची के प्रकाशन का इंतजार कर रहे हैं। प्रकाशन होते ही वह इस मामले में कोर्ट जा सकते हैं। नगर निगम एक्ट में दिए गए वार्ड के आरक्षण के प्रावधान को लेकर सबसे पहले दो नवंबर को सूची तैयार कर शासन के पास मंजूरी को भेजी गई थी। मगर, बाद में शासन ने यह सूची वापिस लौटा दी। शासन ने पांच नवंबर को जब यह सूची लौटाई तो कहा कि जो वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हो चुके है वह अगले वर्ग के लिए महिलाओं के लिए क्यों आरक्षित नहीं हो सकते हैं। नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से यह सुझाव दिया गया था। इसके बाद फिर से वार्ड के आरक्षण की सूची को तैयार कर भेजने के लिए कहा गया। इस सूची को कल फाइनल कर शासन के पास भेजा गया है। मगर, अब इस सूची पर कई नगर निगम के अधिकारी ही सवाल खड़ा कर रहे हैं। इस मामले में कई पार्षद कोर्ट जाने की तैयारी में है और अधिवक्ताओं से सलाह ले रहे हैं। माना जा रहा है कि आरक्षण की सूची के प्रकाशन के तुरंत बाद ही कई पार्षद कोर्ट पहुंच सकते हैं।