युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद सदर सीट से युवा भाजपा नेता संजीव गुप्ता की दावेदारी से जहां टिकट चाहने वालों की चिंताएं बढ़ गई है, वहीं व्यापार समेत कई क्षेत्रों के लोगों ने उनकी दावेदारी का समर्थन कर उनके पक्ष को और मजबूत कर दिया है। इस बीच संजीव गुप्ता ने भरोसा दिया है कि अगर उन्हें इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला तो लाइनपार क्षेत्र को रहने वाली जगह अवश्य बनाएंगे।
युग करवट से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से ही लाइनपार क्षेत्र की लगातार उपेक्षा की गई। अतुल गर्ग ने लाइनपार क्षेत्र में बहुत सारे विकास कार्य कराए। वे लाइनपार क्षेत्र को कनॉट प्लेस बनाने का वादा नहीं करेंगे बल्कि उसे ऐसा स्थान बनाएंगे, जहां लोगों को हर तरह की सुविधा मिल सके। जहां जलभराव ना हो, पीने के लिए स्वच्छ पानी मिले। बच्चों के लिए अच्छे स्कूल हो। इलाज के लिए अस्पताल हो। बच्चियों की उच्च शिक्षा के लिए डिग्री कॉलेज हो।
संजीव गुप्ता ने कहा कि उन्हें राजनीति विरासत में नहीं मिली। बल्कि अपनी मेहनत और लोगों के प्रेम और स्नेह से राजनीति में सक्रिय रहा। पिछले पच्चीस साल से पार्टी में सक्रिय संजीव गुप्ता ने कहा कि उनके लिए राजनीति सिर्फ सेवा का माध्यम है। गाजियाबाद सदर विधानसभा के लिए उनके पास विजन है। किस तरह इस विधानसभा को पूरे उत्तर प्रदेश का सर्वोत्तम विधानसभा बनाया जा सकता है, इसका पूरा विजन उनके पास है। सांसद जनरल वी के सिंह और अनिल अग्रवाल के साथ मिलकर गाजियाबाद को फिर से एक औद्योगिक नगरी के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है।
संजीव गुप्ता ने कहा, ‘ मैं खुद एक उद्यमी हूं। यहां के उद्यमी और व्यापारियों की समस्याओं को बेहतर ढंग से जानता हूं। गाजियाबाद की पहचान एक औद्योगिक शहर के रूप में हुआ करती थी लेकिन सपा-बसपा की सरकारों की गलत नीति और खराब कानून-व्यवस्था के कारण यहां की औद्योगिक छवि धूमिल होती गई। पिछले पांच वर्षों के दौरान व्यापारियों और उद्यमियों में डर की भावना खत्म हुई लेकिन अभी गाजियाबाद के उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है। संजीव गुप्ता ने कहा कि इस क्षेत्र की करीब ढाई लाख आबादी लाइनपार क्षेत्र में रहती है। मेरी प्राथमितकता लाइनपार क्षेत्र के विकास की होगी। लाइनपार क्षेत्र को शहर से जोडऩे के लिए एक और मार्ग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब से उन्होंने इस सीट से दावेदारी की है, तभी से वैश्य समाज के साथ सभी अन्य समाजों का समर्थन उन्हें मिल रहा है। व्यापारी संगठनों ने भी उनका समर्थन किया है।