युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। इस बार भी कोरोना का असर रामलीला मंचन और मेलों में दिखाई दे रहा है। हालांकि, शासन की ओर से जारी इस संबंध में गाइडलाइन जारी करते हुए रामलीला मंचन की अनुमति दी गई है। लेकिन समय से अनुमति जारी ना होने की वजह से इस बार भी शहर में मेलों की रौनक नहीं होगी। हालांकि, छोटे स्तर पर मंचन का आयोजन करने वाली रामलीला समितियों ने सुंदरकांड व पूजन की अनुमति के लिए आवेदन किए हैं। वहीं शहर की प्रमुख रामलीलाओं में भी सीमित स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
शहर में सुल्लामल रामलीला समिति द्वारा घंटाघर रामलीला मैदान, कविनगर रामलीला मैदान, राजनगर रामलीला मैदान, संजय नगर सेक्टर-२३ रामलीला मैदान, विजयनगर, प्रतापविहार सहित एक दर्जन से अधिक स्थानों पर रामलीलाओं का मंचन किया जाता रहा है। मंचन के दौरान भव्य रूप से मेलों का आयोजन भी किया जाता है। लेकिन कोरोना संकट के चलते गतवर्ष रामलीला का मंचन नहीं हो सका था क्योंकि मंचन के साथ मेलों का आयोजन भी किया जाता है जिससे लोगों की भीड़ तो उमड़ती है ही। साथ अच्छा खासा व्यापार भी इन दिनों हो जाता है। लेकिन इस बार भी कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने जमकर कहर बरपाया। इसके बाद धीरे-धीरे आर्थिक गतिविधियों के साथ ही सामाजिक गतिविधियों को भी शुरू किया गया है। दो दिन पूर्व ही प्रदेश सरकार ने रामलीला मंचन की अनुमति दी है जबकि शहर में रामलीलाओं के आयोजन के लिए श्राद्घपक्ष से पूर्व ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लेकिन देरी से गाइडलाइन जारी होने के चलते इस बार भी शहर में रामलीलाओं की रौनक देखने को नहीं मिलेगी। शहर की सबसे पुरानी सुल्लामल रामलीला कमेटी का चुनाव ना होने की वजह से मंचन या अन्य कार्यक्रमों को लेकर क्या रणनीति होगी, इसको लेकर कुछ स्पष्टï नहीं है। वहीं कविनगर रामलीला समिति के अध्यक्ष ललित जायसवाल ने बताया कि रामलीला मंचन के लिए भी कलाकारों की मंडली को छह महीने पहले बुक किया जाता है। मंचन से एक सप्ताह पूर्व ही मंडली आकर तैयारियों में जुट जाती है। वहीं मंचन के साथ मेले का आयोजन होने से ही लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। इसके लिए भी कम से कम छह महीने दुकानों की बुकिंग व अन्य कार्यों के लिए चाहिए होते हैं। ऐसे में इस बार भी कोई पूर्व में तैयारी ना होने से प्रतीकात्मक रूप से ही कार्यक्रम होंगे। विजयादशमी पर पूजन किया जाएगा व प्रतीकात्मक रावण दहन किया जाएगा। संजयनगर रामलीला समिति की अध्यक्ष कौशल ने बताया कि मंचन के बजाए नौ सितंबर से १५ सितंबर तक सांस्कृतिककार्यक्रम व भजन कीर्तन का आयोजन होगा। वहीं राजनगर रामलीला समिति द्वारा भी अन्य धार्मिक आयोजनों को लेकर कोई रणनीति तैयार नहीं की गई है। यानि इस बार भी लोगों को शहर में मेले की रौनक नहीं मिल सकेगी।
दुर्गा पांडालों में स्थापित होंगी छोटी दुर्गा प्रतिमा
गाजियाबाद। नवरात्रों के समय दुर्गा पूजा का बेहद महत्व माना जाता है। घर-घर में पूजन होता है। तो वहीं बंगाली समुदाय द्वारा पांडालों में दुर्गा मां की प्रतिमा स्थापित की जाती है। हालांकि, गतवर्ष जहां आयोजन नहीं हो सके थे वहीं इस बार धार्मिक आयोजनों की अनुमति दी गई है। लेकिन गाइडलाइन के मुताबिक पांडालों में बड़ी प्रतिमा की स्थापना नहीं की जा सकेगी। गाइडलाइन के अनुसार प्रतिमा की अधिकतम ऊंचाई पांच फीट से ऊपर नहीं हो सकेगी। पांडालों में छोटी प्रतिमा ही रखी जाने की शर्त पर ही जिला प्रशासन द्वारा अनुमति प्रदान की जा रही है। एडीएम सिटी कार्यालय में दुर्गा पूजा के आयोजनों के लिए दर्जन भर आवेदन आए हैं। हालांकि, कोरोना संकट से पहले इनकी संख्या तीन गुना अधिक होती थी मगर मेलों की अनुमति ना मिलने की वजह से अब बंगाली समितियों द्वारा समिति स्तर पर पूजन किया जा रहा है। इस बार भी अनुमति के लिए कम संख्या में ही आवेदन आए हैं जिनमें छोटे स्तर पर ही आयोजन किए जाने की अनुमति मांगी गई है। समिति संख्या और छोटी प्रतिमा की शर्त से समितियों में निराशा भी है। लेकिन प्रतीकात्मक रूप से ही सही लेकिन दुर्गा पूजा के पंडालों में पूजन किया जाएगा।