उत्तराखंड सरकार ने आदेश जारी किया, शिवभक्त कांवडिय़ों में भारी निराशा
युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर भले ही थम गई हो, लेकिन अब कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वेरिएंट के चलते तीसरी लहर का खतरा अभी भी बना हुआ है और ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार काफी सतर्क होकर काम कर रही है। भले ही बाजार, मॉल्स या अन्य गतिविधियों शुरू कर दी गई है लेकिन सरकार धार्मिक अनुष्ठानों को कराने में जल्दबाजी नहीं करना चाहती है। यही कारण है कि इस वर्ष भी उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ यात्रा स्थगित कर दी है। इस आशय का आदेश शुक्रवार को उत्तराखंड सरकार के शहरी विकास विभाग की ओर से जारी किया गया। पिछले साल भी कांवड़ यात्रा को स्थगित कर दिया गया था। कांवड़ यात्रा स्थगित होने से शिवभक्त कांवडिय़ों को भारी निराशा हुई है। हर साल लाखों की संख्या में शिवभक्त कांवडि़एं श्रावण शिवरात्रि से पहले हरिद्वार और गोमुख से पवित्र गंगाजल लाकर शिवलिंगों पर चढ़ाते है। गाजियाबाद और इसके आसपास के जिलों के लिए कांवड़ यात्रा एक मेले जैसा होती है। उत्तराखंड सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा है कि उत्तराखंड सरकार ने कोरोना महामारी की वजह से हर वर्ष की भांति सावन महीने में होने वाली कांवड़ यात्रा को इस वर्ष विपरीत परिस्थितियों के चलते रद्द करने का फैसला लिया है।
कोरोना महामारी के चलते लगातार यह दूसरा साल है जब उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ यात्रा को रद्द कर दिया है। शिवभक्त करीब दस दिनों की पैदल यात्रा कर गोमुख और हरिद्वार से गंगा का पवित्र जल लाते हैं। उत्तराखंड सरकार ने भले ही अपने राज्य में कांवड़ यात्रा रद्द करने का आदेश जारी किया है, लेकिन इसका असर अन्य राज्यों से आने वाले कांवडिय़ों पर भी हो सकता है। देश के अन्य राज्यों से भी कांवडि़ए हरिद्वार और ऋषिकेश गंगाजल लाने के लिए पहुंचते हैं। उत्तराखंड के बाद एहतियात के तौरा पर अन्य राज्य सरकारें जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली आदि में भी कांवड़ यात्रा रद्द की जा सकती है। हालांकि इन राज्यों की ओर से कांवड़ यात्रा को लेकर कोई ऑफिशियल बयान जारी नहीं किया गया है।