युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के जिलों में राशन कार्ड सरेंडर को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले जहां हर जिले में बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर राशन कार्ड सरेंडर कराए जा रहे हैं, वहीं अब अधिकारी इसे लेकर एकदम से बैकफुट पर आ गए हैं। यहां तक की शासन स्तर से अधिकारी अब इस मामले में कोई भी निर्देश जारी करने से इंकार कर रहे हैं। जबकि जिले के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें शासन से इस सम्बंध में निर्देश मिले थे, जिसके बाद ही राशन कार्ड सरेंडर कराए जा रहे थे। अपात्रों की जांच नियमित रूप से चलती रहती है। स्थानीय अधिकारी भी अब इस मामले में बात करने से कतरा रहे हैं और एक-दूसरे पर मामले को डाल रहे हैं।
बता दें कि मई माह से ही प्रदेश के हर जिले में राशन कार्ड सरेंडर कराए जा रहे हैं। गाजियाबाद जिले में भी राशन कार्ड सरेंडर कराने के लिए न सिर्फ प्रचार-प्रसार किया गया, बल्कि छह केन्द्र बनाए गए थे। लेकिन जब इस मामले में विपक्ष के नेताओं ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया तो शासन में बैठे अधिकारियों ने ऐसा कोई निर्देश जारी करने से इंकार कर दिया। यहां तक की जिले के अधिकारियों से ही जवाब तलब करना शुरू कर दिया कि किसके निर्देश पर कार्ड सरेंडर कराए जा रहे हैं? आलम यह है कि बड़ी संख्या में लोग राशन कार्ड जमा कराने पहुंच रहे हैं, लेकिन अब उनके कार्ड को जमा कराने से भी विभाग बच रहा है। यहां तक की कार्ड धारकों से लिखवाया जा रहा है कि वह किन कारणों से कार्ड जमा कराने आ रहे हैं। जबकि पिछले सप्ताह तक बिना किसी कारण के ही कार्ड जमा किए जा रहे थे।