युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। पिछले एक सप्ताह से जिले भर से राशन कार्ड सरेण्डर किए जा रहे थे। बड़ी संख्या में लोग अपना राशन कार्ड जमा कराने पहुंच रहे थे, लेकिन अब अधिकारी अपने इस अभियान को लेकर बैकफुट पर आ गए हैं। शासन से जारी हुए निर्देशों के बाद जिले के अधिकारी भी असमंजस की स्थिति में हैं। अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ पात्र-आपात्र राशन कार्ड धारकों के लिए ही निर्देश दिए थे। प्रदेश के खाद्य तथा रसद आयुक्त सौरभ बाबू ने इस सम्बंध में निर्देश जारी करते हुए कहा है कि किसी से राशन कार्ड सरेण्डर नहीं कराए जा रहे हैं, बल्कि आपात्रों के मानक निर्धारित किए गए हैं। इनमें नगर क्षेत्र में समस्त आयकर दाता, किसी परिवार के पास चार पहिया वाहन, एसी, पांच केवीए या उससे अधिकक्षमता का जनरेटर हो, ऐसा परिवार जिसके पास सौ वर्ग मरीट से अधिक का स्वअर्जित आवासीय या कार्पोट प्लॉट हो, परिवार के किसी सदस्य के पास ८० वर्ग मीटर से अधिक का कॉर्पेट एरिया हो, ऐसे परिवार जिनके पास से एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस हो, परिवार के सदस्यों की आय तीन लाख रुपए से अधिक हो, ग्रामीण क्षेत्र में भी एसी, वाहन, जनरेटर के अलावा पांच एकड़ से अधिक संचित जमीन, सदस्यों की आय दो लाख से अधिक या शस्त्र लाइसेंस वालों को अपात्र कहा गया है। हालांकि नौ मई को गाजियाबाद के जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा जारी पत्र में भी यह नियम दर्शाए गए थे और आपात्रों से कार्ड जमा कराने के निर्देश दिए गए थे। यहां तक की एक सप्ताह में राशन कार्ड सरेंडर न करने पर कार्ड निरस्त के अलावा वैधानिक कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई थी। जिसके बाद से बड़ी संख्या में लोग अपना कार्ड जमा कराने विभाग पहुंचने लगे थे। इतना ही नहीं विभाग द्वारा छह केन्द्र भी कार्ड जमा कराने के लिए बनाए गए थे, जिनपर तीन हजार के करीब लोग अपना कार्ड जमा करा चुके थे। लेकिन अब ऐसे लोग भी अपना कार्ड सरेण्डर कराने पहुंचने लगे जिनके घरों में टीवी आदि भी हैं। डीएसओ डॉ. सीमा का कहना है कि विभाग सिर्फ आपात्रों लोगों के ही कार्ड निरस्त करने की कार्रवाई कर रहा है। शासन से जारी निर्देशों के आधार पर जो आपात्र हैं, सिर्फ उन्हीं के निरस्त किए जाएंगे। हालंाकि अधिकारी अब इस मामले में कोई स्पष्टï जवाब देने को भी तैयार नहीं हैं।