विशेष संवाददाता
रामपुर (युग करवट)। रामपुर विधानसभा उप चुनाव में भले ही भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की हो और आजादी के बाद पहली बार कमल खिला हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस जीत को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। भले ही सबकुछ सही हो, लेकिन कोई कहता है गड़बड़ी हुई है, कोई कहता है किसी अधिकारी के कहने पर जीत हुई है तो कोई कहता है कि सीट छीनी गई है। यह चर्चा सपा में ही नहीं, बल्कि भाजपा में भी अंदरखाने चल रही है। अब इसमें कितनी हकीकत है यह तो नहीं पता, लेकिन ‘जो जीता वो सिकंदर’ वाली कहावत ही चरितार्थ हो रही है। चर्चा के पीछे कारण यह है कि रामपुर शहर की सीट मुस्लिम बाहुल्य सीट है और आज तक इस सीट से कभी भी भाजपा का उम्मीदवार नहीं जीता। इस बार ऐसा क्या हो गया कि भाजपा के खाते में यह सीट चली गई। हालांकि चर्चाओं पर भरोसा करें तो इस जीत के पीछे पुलिस की अहम भूमिका बताई जा रही है। वोटर्स को घर से निकलने ही नहीं दिया गया और बाकायदा बैरिकेटिंग लगाकर ऐसा माहौल पैदा किया कि वोटर बाहर ही नहीं निकला। जिस क्षेत्र में हमेशा लाखों से जीत होती थी वह हजारों में रह गई। जिस क्षेत्रों में हजारों से जीत होती थी वह कुछ सैकड़ों में सिमट गई।
बहरहाल राजनीतिक गलियारों में जो भी चर्चाएं चल रही हों, लेकिन इस चुनाव ने यह भी तय कर दिया है कि अब मुसलमानों को भी भाजपा से कोई परहेज नहीं है। अगर चुनावी आंकड़ों पर और बूथ वाइज गौर करें तो भाजपा को शहर सीट से मुस्लिमों के अच्छे खासे वोट मिले हैं। भाजपा उम्मीदवार आकाश सक्सेना खुद इस बात को मानते हैं कि उनकी इस जीत में मुसलमानों की भी भूमिका है। यह बयान भी अपने आप में गौर करने वाला है।
सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास करने वाली भाजपा ने भले ही किसी मुस्लिम को अब तक चुनाव में उम्मीदवार न बनाया हो, लेकिन इस बार रामपुर की सीट से जिस तरह मुसलमान भाजपा से जुड़ा है अब गेंद भाजपा के पाले में है कि अब वह जमीनी तौर पर इस नारे पर अमल करती है या नहीं।