राज कौशिक
देवप्रयाग। योगगुरु एवं पतंजलि के संस्थापक बाबा रामदेव ने बताया की वैदिक शिक्षा पर आधारित विश्व का सर्वोत्तम पतंजलि विश्वविद्यालय अगले सात-आठ वर्षों में बनकर तैयार हो जाएगा। इस विश्वविद्यालय को ऑक्सफोर्ड और हावर्ड यूनिवर्सिटी से भी श्रेष्ठ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। संत मोरारी बापू की रामकथा के दौरान एक विशेष मुलाकात में बाबा रामदेव ने बताया की उनका लक्ष्य विश्व का सर्वोत्तम विश्वविद्यालय बनाने का है। ये वैदिक संस्कृति पर आधारित होगा लेकिन सभी तरह की अत्याधुनिक शिक्षाएं यहां प्राप्त हो सकेंगीं। वो श्रेष्ठ मानव और छात्र बनाना चाहते हैं जो पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन कर सकें। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का नाम पतंजलि ही होगा। इसकी स्थापना देश की राजधानी दिल्ली में की जाएगी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के साथ चल रहे विवाद के सवाल पर बाबा रामदेव ने कहा कि उनके बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया। वो आयुर्वेद के पक्षधर हैं।
उनकी नस-नस में आयुर्वेद बह रहा है लेकिन एलोपैथी या किसी अन्य पैथी के खिलाफ वो नहीं हैं। कोरोना में जितना लाभ एलोपैथी से लोगों को हुआ है, उससे कहीं ज्यादा लाभ आयुर्वेद से हुआ है। ये सत्य है। इसको स्वीकार किया जाना चाहिए। भारत के घर-घर में इसके प्रमाण मौजूद हैं। कोई भी इसका सर्वे कर सकता है। उन्होंने इस बात पर खुशी जाहिर की कि मौजूदा भारत सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है।
पतंजलि के उत्पादों से मोटा पैसा कमाने के कुछ लोगों के आरोप पर बाबा रामदेव ने हंसते हुए कहा कि वैदिक सूत्र है, श्रम से अर्थ की प्राप्ति होती है। जो लोग भी मेहनत करते हैं, वो पैसा कमाते ही हैं। हमने श्रम किया तो हमारे पास पैसा आया। पैसा आने के बाद देखना ये होता है कि उसका उपयोग स्वार्थ में किया जा रहा है या परमार्थ में। हमने परमार्थ में उसका उपयोग किया। इस वजह से और पैसा आया। जैसे जैसे पैसा आता गया, उसे परमार्थ के कार्यों में लगाते रहे। अभी भी ऐसा ही किया जा रहा है।उत्पादों में केमिकल का प्रयोग कर लोगों को नुकसान पहुंचाने वाली विदेशी कंपनियों का मार्केट ठंडा पड़ा है, इसलिए उनके खिलाफ तरह तरह के षड्यंत्र किए जाते हैं। बाबा रामदेव ने कहा कि कोई चाहे कुछ भी कहता रहे, इससे वो बिल्कुल प्रभावित नहीं होते। क्या आप इतने विरोध से विचलित नहीं होते, इस सवाल पर बाबा रामदेव ने हंसते हुए कहा, अब तो स्थिति ये हो रही है कि जिस दिन उनका विरोध नहीं होता, उन्हें लगता है कि उनकी कार्यप्रणाली में कोई कमी रह गई है।