युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर आधारित रिपोर्ट भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को भेज दिया गया है। यह रिपोर्ट भाजपा प्रदेश इकाई की ओर से भेजी गई है। भाजपा ने चुनाव परिणाम की गहन समीक्षा के बाद यह रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में बताया गया कि केंद्र की जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि का पार्टी को फायदा पहुंचा है। रिपोर्ट में बताया गया कि कृषि सुधार कानूनों को लेकर हुए आंदोलन का चुनावी परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ा है। विधानसभा चुनाव में भाजपा को 273 सीटों पर जीत मिली थी।
रिपोर्ट में बताया गया कि जिस रणनीति के साथ पश्चिम उत्तर प्रदेश में सपा-रालोद गठबंधन का मुकाबला किया गया, वह कामयाब रहा। सपा ने रालोद के भरोसे जिस जाट समीकरणों पर दांव लगाया था, वह फेल हो गया। पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन के असर वाले जिन 30 सीटों पर रालोद चुनाव लड़ी थी, वह केवल आठ सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई। वहीं, बसपा के कोर वोटर का भाजपा में आना पार्टी के लिए लाभदायक रहा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 122 सीटों पर बसपा ने ऐसे उम्मीदवार खड़े किए थे, जो सपा के उम्मीदवार की ही जाति के थे। इससे इन 122 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों को मदद मिली। इनमें जिन 91 सीटों पर सपा ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे, उसी सीट पर बसपा ने भी मुस्लिम प्रत्याशी उतार दिए। वहीं 15 सीटों पर सपा के यादव उम्मीदवारों के सामने बसपा ने भी यादव प्रत्याशी उतारे। इसका सीधा फायदा भाजपा को मिला और 122 सीटों में भाजपा गठबंधन को 68 सीटों पर जीत हासिल हुई। पश्चिम यूपी में पहले चरण के चुनाव उन जिलों में हुए जहां किसान आंदोलन का असर सबसे ज्यादा था, वहां अपेक्षाकृत परिणाम बेहतर रहा।
पहले चरण की 58 सीटों में भाजपा को 46 सीटें मिलीं। पश्चिम में बसपा का वोट भाजपा की ओर शिफ्ट हुआ है। पहले चरण की सीटों पर भाजपा ने 17 जाट प्रत्याशी उतारे थे, उनमें 10 प्रत्याशी जीते, वहीं सपा ने 7 प्रत्याशी उतारे थे, जिनमें तीन जीते, रालोद ने 10 जाट प्रत्याशी उतारे थे, उनमें चार ही जीत सके। रिपोर्ट में बताया गया कि मुस्लिमों का रूझान सपा की ओर था। लेकिन जहां रालोद प्रत्याशी खड़े थे, वहां मुस्लिमों का रूझान बसपा की ओर भी देखा गया।
रिपोर्ट में बताया गया कि भाजपा के सीटिंग विधायकों के प्रति लोगों की नाराजगी का असर परिणामों पर दिखाई नहीं दिया। पार्टी ने विधायकों के प्रति विरोध की रिपोर्ट मिलने के बाद उनके ज्यादा से ज्यादा टिकट काटने की योजना बनाई थी, वहीं उसे खारिज करते हुए 214 मौजूदा विधायकों पर ही दांव लगाने की रणनीति का फायदा भी पार्टी को मिला। 2017 में चुनाव जीतकर आए 214 विधायकों को भाजपा ने 2022 में भी चुनाव मैदान में उतारा, उनमें से 170 जीते। यानी करीब 79 फीसदी सीटें भाजपा की झोली में आयीं। वहीं जिन सीटों 104 सीटों पर प्रत्याशी बदले गए, उनमें भी 80 पर भाजपा को जीत हासिल हुई। यानी 77 फीसदी सीटें भाजपा गठबंधन को मिल गईं।