खिलाफत आंदोलन ने हिन्दू और मुसलमानों के बीच दूरियां पैदा कीं
युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। जाने-माने शिक्षाविद् और लेखक ख्वाजा इफ्तिखार अहमद  का मानना है कि 1920 के खिलाफत आंदोलन से ही हिन्दू और मुस्लिमों के बीच दूरियां बढ़ी और यह दूरी आगे बढ़ती गई। जिसका परिणाम भारत विभाजन को लेकर आया। रविवार को अपनी किताब-द मीटिंग ऑफ माइंड्स और इसके हिन्दी रूपांतरण ‘वैचारिक समन्वयÓ के विमोचन के मौके पर उन्होंने कहा कि 1920 का खिलाफत मूवमेंट मुसलमानों की पहली गलती थी। हमनें किसके खिलाफ खिलाफत मूवमेंट चलाया। इस मूवमेंट से ही आरएसएस के बाद से ही आरएसएस का जन्म हुआ। आरएसएस के नेता सामने आए। अगर खिलाफत मूवमेंट नहीं होता तो हम विभाजित भी नहीं होते और आज का आरएसएस या भाजपा भी नहीं होती।
उन्होंने कहा कि विभाजन का सबसे बड़ा नुकसान भारत के मुसलमानों को हुआ। आज भी उन्हें अपने मुल्क के प्रति वफादार होने का सर्टिफिकेट देना पड़ता है। खिलाफत आंदोलन के बाद अबतक मुसलमानों का कोई बड़ा संगठन नहीं है। कौम का कोई विश्वसनीय नेता नहीं है। संघ जैसा संगठन अगर मुसलमानों के पास भी होता तो आज यह नौबत नहीं आती। यही कारण है कि रेस्पॉन्स की जगर रिएक्शन होती है।
पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहा राव के सलाहकार रहे ख्वाजा इफ्तीखार अहमद ने कहा कि उन्होंने हिन्दू और मुसलमानों के बीच डायलॉग की जरूरत पर जोर दिया तो उन्हें आरएसएस और भाजपा का एजेंट कहा गया। कई लोगों ने कहा कि पागल है लेकिन मैं अपने लक्ष्य के साथ आगे बढ़ता गया क्योंकि मुझे मालूम है कि नफरत दोनों कौमों को बर्बाद कर देगी। सारी जिंदगी जोडऩे वालों का साथ दिया। तोडऩे वालों के साथ लड़ता रहा हूं और लड़ता रहूंगा। शेष पृष्ठ चार पर