भाजपा का मिशन साउथ पर ज्यादा जोर
नई दिल्ली (युग करवट)। उत्तर भारत में पकड़ मजबूत करने के बाद 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने ज्यादा फोकस दक्षिण के राज्यों पर है। भाजपा को इस बात का अहसास हो गया है कि पूरे देश में अकेली भाजपा द्वारा 370 सीटें लाने के लिए दक्षिण के किलों को फतह करना होगा। इसके लिए भाजपा ने बेहद गहराई वाली रणनीति तैयार की है। इसके तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तमिलनाडू के एक सीट से उतारने की तैयारी चल रही है। दरअसल, दक्षिण भारत की तीन राज्य, तमिलनाडू, केरल और आंध्र प्रदेश की तीन राज्यों की कुल सीटों को मिलाकर 84 सीटों में से भाजपा के पास एक भी सीट नहीं है। यहीं चिंता भाजपा को सताए जा रही है। इन राज्यों में भाजपा हिन्दू मतदाताओं तक पहुंचने के लिए मंदिर राजनीति का सहारा लिया है। यही कारण है कि चुनाव प्रचार से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण के इन तीन राज्यों के लगभग सभी मंदिरों में पूजा अर्चना की। तमिलनाडू मेें लोकसभा की 39, केरल में 20 और आंध्र प्रदेश में कुल 25 सीटें है। आंध्र प्रदेश में टीडीपी के साथ गठबंधन की बातें चल रही है लेकिन अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। जबकि तमिलनाडू और केरल में भाजपा खुद सभी सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। भाजपा का फोकस इन 84 सीटों में से 40 सीटों पर है, जहां पार्टी का जनाधार बढ़ गया है। तेलंगाना और कर्नाटक में पार्टी पहले से ही मजबूत है। तेलंगाना से भाजपा के चार और कर्नाटक से भाजपा के 14 सांसद है। भाजपा को उम्मीद है कि तेलंगाना और कर्नाटक में इस बार भाजपा के सांसदों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को तमिलनाडू की कोएंबतूर सीट से उतारने की रणनीति है। दरअसल, कोएंबतूर सीट पर भाजपा और आरएसएस का काफी दबदबा है।
भाजपा के रणनीति कारों का मानना है कि मोदी के चुनाव लडऩे से भाजपा का वोटिंग प्रतिशत बढ़ जाएगा। इसका कई सीटों पर असर पड़ सकता है।