युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। मोदीनगर में बुधवार सुबह हुई घटना से शहर का हर कोई गमगीन है। मोदीनगर के हापुड़ मार्ग पर यूटर्न लेते समय स्कूल बस कॉलोनी के गेट से टकरा गई और उसी समय बस की खिडक़ी से सिर निकालकर उल्टी कर रहे छात्र का सिर गेट से टकरा गया। दयावती पब्लिक स्कूल की बस से हुई इस घटना के बाद से ही स्कूलों की ओर से बच्चों को लाने और ले जाने के तौर तरीकों पर सवाल उठने लगे हैं।
यह घटना स्कूलों के लिए भले ही आंखें खोलने वाली हो, मगर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि स्कूलों की ओर से बच्चों को घर से लाने और लेे जाने के लिए राम भरोसे ही छोड़ा गया है। ज्यादातर बसों में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइंस का पालन नहीं हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, बच्चों को घर से लाने और घर तक छोडऩे के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जो गाइडलाइंस बनाई है, उसके तहत एक कंडक्टर और उस रूट पर एक टीचर और आया का होना जरूरी है। लेकिन कल की घटना में बस में न तो कंडक्टर था, ना ही कोई टीचर या आया थी। बताया जा रहा है कि बच्चे ने उल्टी करने के लिए सर को बाहर निकाला था, ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चे को उल्टी आ रही है, इसकी जानकारी किसी को क्यों नहीं हुई। इसका तात्पर्य है कि बस में कोई टीचर या आया नहीं थी।
पैरेंट एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा त्यागी ने इस लापरवाही के कारण स्कूल की मान्यता रदद करने की मांग की है। उन्होंने युग करवट से बातचीत में कहा कि प्रथम दृष्टि में स्कूल प्रबंधन, प्रशासन और आरटीओ इस घटना के लिए जिम्मेदार है। बच्चों की बस में कंडक्टर, आया और टीचर नहीं है, यह सोचा भी नहीं जा सकता है। साफ तौर पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन है।
सीमा त्यागी ने कहा कि किसी परिवार का लाल चला जाता है, इसकी भरपाई मुआवजे से नहीं की जा सकती है। गाजियाबाद में इससे पहले अरमान नामक छात्र के साथ भी ऐसी ही घटना हुई थी। आज भी उसकी मां न्याय के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना के लिए गुनहगारों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन के महासचिव सचिन सोनी का कहना है कि जिस बस से यह घटना हुई, उस बस का फिटनेस सर्टिफिकेट की मियाद खत्म हो चुकी थी। इसके बाद भी यह बस बच्चों को लाने ले जाने में इस्तेमाल हो रही थी। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? निश्चित रूप से आरटीओ और स्कूल प्रबंधन। आरटीओ की ओर से स्कूल बसों की जांच ही नहीं कराई जाती है। जांच के नाम पर खानापूर्ति होती है। सचिन सोनी ने कहा कि गाजियाबाद के ज्यादातर स्कूलों में अवैध तरीके से बसें चल रही है। कई ड्राइवर के पास लाइसेंस तक नहीं है।
कई ड्राइवर अनुभवहीन भी होते है। कल की घटना में ड्राइवर की अनुभवहीनता सामने आ रही है। गेट के इतने करीब से कोई गाड़ी को टर्न कैसे करा सकता है? सचिन सोनी ने कहा कि इस मामले में सरकार ने सख्ती दिखाई है। मुख्यमंत्री ने डीएम से मामले की रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट के बाद अवश्य ही कार्रवाई होगी।