युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। जब से भाजपा की ओर से विभाग और प्रकोष्ठों की रेवडिय़ां बांटी गई तभी से इन विभागों व प्रकोष्ठों के पदाधिकारी नेताओं की परिक्रमा करने में लगे हुए हैं। ओबीसी मोर्चा के महानगर अध्यक्ष मनोज यादव को तो परिक्रमा का इस कदर चस्का लगा है कि जनाब को लगता है कि नेताओं की परिक्रमा करने से ही पद पर बना रहा जा सकता है। जब से ओबीसी मोर्चा के महानगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है, मनोज यादव हर रोज किसी न किसी नेता की परिक्रमा कर रहे हैं। इतना ही नहीं, परिक्रमा करने के बाद इनकी तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट भी कर रहे हैं। यह तब है जब संगठन महामंत्री सुनील बंसल ने विभाग और प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों को स्पष्टï हिदायत दे रखी है कि वे किसी नेता की परिक्रमा कर समय को व्यर्थ न गंवाएं। इस समय का सदुपयोग खुद को मिली जिम्मेदारियों को निभाने में करें। लेकिन ऐसा लगता है कि ओबीसी मोर्चा के महानगर अध्यक्ष को तो प्रदेश के संगठन महामंत्री की हिदायतें महज एक भाषण सा लगता है। अपनी जिम्मेदारियों को भूलकर वे जबर्दस्त तरीके से नेताओं की परिक्रमा और उनका आशीर्वाद लेने में लगे हुए हैं। ओबीसी मोर्चा के ही एक पुराने कार्यकर्ता का दर्द समझ में आ सकता है। यह कार्यकर्ता काफी समय से ओबीसी मोर्चा में मेहनत कर रहे हैं लेकिन इस बार उन्हें महानगर में जगह नहीं मिल पाई। उनका कहना है कि पार्टी में अब चाटुकारिता और चापलूसी का ही बोलबाला है। जो कार्यकर्ता पूरे दिन ओबीसी समाज को पार्टी के साथ जोडऩे की मेहनत कर रहा हैं, उनको पूछने वाला कोई नहीं है। और, जो नेताओं की परिक्रमा और चरणस्पर्श कर रहा है, उनकी बल्ले-बल्ले हो रही है।
उन्होंने सवाल किया महानगर अध्यक्ष मनोज यादव यह बता दें कि उन्होंने आजतक ओबीसी समाज के कितने लोगों के पास जाकर पार्टी की नीतियों और सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताया। दरअसल, उन्हें इससे कोई मतलब ही नहीं है। उन्हें तो सिर्फ अपने आकाओं को खुश करना है। क्या आकाओं को खुश करने के लिए उन्हें ओबीसी मोर्चा का महानगर अध्यक्ष बनाया गया है।