गाजियाबाद (युग करवट)। नगर निगम की बोर्ड बैठक में तीस लाख रुपए रिश्वत के आरोपों पर महापौर द्वारा गर्दन अलग करने की धमकी को लेकर वार्ड-६० के पार्षद सचिन डागर ने अपना पक्ष रखा है। सचिन डागर ने कहा कि महापौर नगर निगम की अभिभावक की तरह होती है। ऐसे में पार्षद के पास अगर कोई समस्या या शिकायत होगी तो वह उसे अपने अभिभावक के समक्ष ही उठाएंगे। ऐसे में निगम की अभिभावक महापौर को इस तरह से किसी समस्या को लेकर धमकी देना उचित नहीं है। बल्कि उन्हें इस मामले को सुन कर मामले की जांच के निर्देश देने चाहिए थे, ताकि मामला स्पष्टï होता और कार्य में भी पारदर्शिता आती। सचिन डागर ने कहा कि वार्ड की समस्या उठाना किसी पार्षद के लिए गलत है क्या, उन्होंने भी बोर्ड बैठक में वहीं किया। तीस लाख देकर सडक़ बनाई गई है। अगर ऐसा नहीं है तो अभी तक इस मामले पर जांच क्यों नहीं शुरू की गई। महापौर धमकी देने के बजाए मामले की जांच कराएं तो बेहतर होगा।