भारतीय जनता पार्टी का इस लोकसभा चुनाव में राष्टï्रीय लोकदल से गठबंधन है। दोनों दल संयुक्त रूप से चुनाव प्रचार का दावा भी करते हैं मगर धरातल पर कुछ ओर ही नजर आता है। अभी हाल ही में मुराद नगर के कई गांवों में भाजपा प्रत्याशी अतुल गर्ग के कार्यक्रम रखे गए थे। इन कार्यक्रमों में विधायक अजीतपाल त्यागी और ब्लॉक प्रमुख राजीव त्यागी प्रमुख रूप से नजर आए। इन कार्यक्रमों के जो फोटो मीडिया को जारी किए गए थे उनमें एक बात बड़ी महत्वपूर्ण थी कि इनमें राष्टï्रीय लोकदल के नेता दिख नहीं रहे थे। इस बात को सभी जानते हैं कि शहरी क्षेत्र के मुकाबले देहात और उसमें भी खासकर मुराद नगर के गांवों में रालोद का वर्चस्व अधिक है। रालोद के जिलाध्यक्ष अमित त्याागी सरना खुद मुराद नगर से हैं। वह जिला पंचायत सदस्य भी हैं। अब अगर क्षेत्र में रालोद अध्यक्ष ही साथ नहीं नजर आएंगे तो जनता को गठबंधन की एकता का अहसास कैसे होगा। अगर मुराद नगर के गांवों में जनसंपर्क किया जाए और उससे रालोद के नेताओं को, कार्यकर्ताओं को देर रखा जाएगा तो गठबंधन की एकता दिखाई कैसे देगी। बताया यह भी जा रहा है कि मुराद नगर क्षेत्र में चुनाव प्रबंधन और प्रचार की कमान पूरी तरह से विधायक अजीतपाल त्यागी के ळाथ में हैं। हो सकता है कि यही समझा जा रहा हो कि जब विधायक ने खुद कमान संभाल रखी है तो किसी ओर की जरूरत ही कहां पड़ेगी। जबकि बम्हेटा में हुए भाजपा उम्मीदवार के जनसंपर्क के दौरान रालोद कार्यकर्ताओं को साथ होना दिखाया गया। इससे ऐसा प्रतीत हुआ जैसे कि मुराद नगर में रालोद को साथ ना रखकर जो नकारात्मक संदेश गया उसे किसी तरह से समाप्त किया जाए। यह एक तरह से मात्र औपचारिकता जैसा रहा। जबकि होना तो यह चाहिए कि प्रत्याशी के हर कार्यक्रम में हर मंच पर रालोद नेताओं को उचित स्थान दिया जाना चाहिए। अगर सम्मान नहीं मिलेगा तो रालोद नेता बागपत चुनाव प्रचार में चले जाएंगे। इससे भाजपा को गठबंधन का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। वैसे भाजपा के कर्ताधर्ता इस पर ज्यादा प्रकाश डाल पाएंगे।