प्रमुख अपराध संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। गाजियाबाद कमिश्नरेट के पहले पुलिस कमिश्नर २००३ बैच के आईपीएस अजय कुमार मिश्रा ने मीडिया से रबरू होते हुए कहा कि वह बातों में नहीं काम में विश्वास रखते हैं और दिखावे से भी दूर रहते हैं। उन्होंने कहा ‘मैं खुद को बात से नहीं, बल्कि अपने काम से सिद्घ करता हूं।’ पत्रकारों के सवाल के जवाब देते हुए श्री मिश्रा ने कहा कि उनकी प्राथमिकता कमिश्नरेट को अपराधमुक्त व आमजनों को भयमुक्त करने की होगी।
पुलिस उपायुक्त ने कहा कि कमिश्नरेट सिस्टम का फुल फ्लैश क्रियांवन होने में जहां दो से चार माह लग जायेगें, वहीं न्यायायिक शक्तियों के स्थानांतरित होने में कम से कम पंद्रह दिन लगेंगे। उन्होंने बताया कि उनका पहला काम अपराध पर नियंत्रण, वारदातों का खुलासा और महिलाओं व छात्राओं के साथ घटित होने वाली घटनाओं पर अंकुश लगाना होगा।
इसके अलावा कमिश्नरेट सिस्टम को वैज्ञानिक व भौतिक स्तर पर मजबूत करने की कवायद उन्होंने शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि यूपीएससी के फाइनल रिजल्ट में उनकी पांचवी रैंक आई थी। इतनी अच्छी रैंक के आने पर भी उन्होंने आईएस कैडर चुना, क्योंकि उनके पिता पुलिस महकमें में थे और इसी वजह से उन्हें खाकी से प्यार हो गया था। साथ ही वह यह भी मानते थे कि खाकी आमजनों की अधिक पीड़ा हर सकती है। उन्होंने बताया कि उनकी प्राथमिक शिक्षा वारणसी में हुई। उन्होंने बीए हिस्ट्री ऑनर्स से की। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी का एग्जाम क्लीयर किया। इसके उपरांत वह दो बार सुल्तानपुर, इटावा, महोबा, बागपत, प्रयागराज मैनपुर, वाराणसी व कानपुर के एस/एसएसपी रहे। सन २०१५ में व केद्र की प्रतिनियुक्ति पर चले गये। इस दौरान वह कई साल आईबी और लगभग ढाई साल जम्मू-कश्मीर में तैनात रहे। श्री मिश्रा ने बताया कि सन २००९ और २०१४ के चुनाव में निर्वाचन आयोग के आदेश पर कप्तान बनाये गये।
इसी साल सात सितंबर को वह केंद्र की प्रतिनियुक्ति से वापस उत्तर प्रदेश पहुंचे और अब तक डीजीपी कार्यालय में तैनात रहकर प्रतिक्षारत रहे। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि अपराध की जिम्मेदारी उनकी और गुड वर्क टीम के नाम रहे। उन्होंने बताया कि आने वाले कुछ समय में शासन की ओर से कमिश्नरेट को मैन पॉवर के रूप में लगभग दस-बारह आईपीएस, एक दर्जन से अधिक पीपीएस, लगभग ४०० निरीक्षक/उप-निरीक्षक और 1 हजार से अधिक आरक्षी व मुख्य आरक्षी मिलेंगे। श्री मिश्रा ने बताया कि आमजन और अन्य विभाग के सहयोग से ट्रैफिक सिस्टम को चुस्त-दुरूस्त किया जायेगा। साथ ही जाम लगाने एवं अतिक्रमण करने वाले लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि वह जाम लगाने को अपराध की श्रेणी में मानते हैं, क्योंकि इससे आमजनों, रोगियों व छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।