युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। विधानसभा २०२२ के चुनाव को लेकर सभी दल अपनी-अपनी तैयारियों में लगे हैं। वहीं टिकट के दावेदार भी अपने हिसाब से टिकट के लिये जोर आजमाइश कर रहे हैं। गाजियाबाद में किसको टिकट मिलेगा, किसकों नहीं मिलेगा, इसको लेकर भाजपा में खूब चर्चाएं चल रही हैं। अगर चर्चाओं पर भरोसा करें तो मौजूदा विधायकों में से दो के टिकट कटने के दावे बड़ी मजबूती के साथ किये जा रहे हैं। वहीं साढ़े चार वर्ष से विधानसभा चुनाव का इंतजार कर रहे भाजपा के कुछ नेताओं को लगने लगा है कि शायद अब उनकी दाल टिकट के मामले में भाजपा में गलने वाली नहीं है इसलिए उन्होंने अब दूसरे दरबार में भी हाजिरी लगानी शुरु कर दी है।
चर्चाओं पर भरोसा करें तो भाजपा के दो मजबूत ठाकुर नेता अखिलेश यादव के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। हालांकि अभी तक इन नेताओं को सपा की ओर से कोई भी सकारात्मक जवाब नहीं दिया गया है, लेकिन यदि भाजपा से मुकाबले की बात होगी तो हो सकता है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव भाजपा के इन ठाकुर नेताओं को पार्टी में शामिल करके एक संदेश देने की कोशिश करें। लेकिन ठाकुर नेताओं की शर्त है कि उन्हें विधानसभा का टिकट दिया जाये लेकिन अभी तक बात नहीं बनी है। दरअसल, इन नेताओं की छवि काफी अच्छी है। चुनाव का अनुभव भी है, उसके बाद भी भाजपा इन पर विचार नहीं कर रही है। इसलिए ये मजबूर होकर दूसरे दलों में जोर आजमाइश कर रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि यदि ये लोग भाजपा को छोड़ दें तो निसंदेह एक बड़ा नुकसान पार्टी को हो सकता है। ये ठाकुर नेता कौन हैं, इस बारे में जब सपा के एक नेता से मालूम किया तो उन्होंने कहा कि अभी नाम नहीं बता सकते। लेकिन ये बात सही है कि इन ठाकुर नेताओं ने अखिलेश यादव से जरूर मुलाकात की थी। हो सकता है कि ये मुलाकात कोई शिष्टïाचार मुलाकात हो, लेकिन चुनावी माहौल में शिष्टïाचार मुलाकातें कम ही होती हैं और जिन नेताओं ने मुलाकात की है, वो २०२२ चुनाव में मजबूत दावेदार हैं। इसलिए शिष्टïाचार मुलाकात कहना सही नहीं होगा।
वहीं भाजपा के एक नेता ने भी आपस में चर्चा की है कि सपा के ठाकुर नेता ने इस बात की पुष्टिï की है कि कुछ भाजपा के ठाकुर नेताओं ने अखिलेश यादव से मुलाकात की है। वहीं भाजपा में भी टिकट को लेकर रोज नई-नई चर्चाएं चल रही हैं। अगर हाल की तस्वीरों पर गौर किया जाये तो भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष मयंक गोयल जिस तरह सक्रिय दिखाई दे रहे हैं और हर कार्यक्रम में क्षेत्रीय सांसद एवं मंत्री वीके सिंह उनको साथ लेकर चल रहे हैं, हो सकता है कि वो भी किसी को जोर का झटका धीरे से दे दें।
गाजियाबाद की एक विधानसभा में उम्मीदवार को लेकर भी बहुत चर्चाएं चल रही हैं। लोग दावा कर रहे हैं कि संभवत: मौजूदा विधायक का टिकट कटना तय है और इस सीट के लिये एक शिक्षाविद् को आगे किया जा रहा है। शिक्षाविद् की बहुत ही साफ-सुथरी छवि है, वह पार्टी के प्रति समर्पित हैं और हर चुनाव में किसी ना किसी उम्मीदवार के प्रभारी रहे हैं, लंबा अनुभव है। प्रदेश के दो बड़े नेताओं से उनके पारिवारिक संबंध हैं। यदि उनको पार्टी टिकट देती है तो कम से कम उनकी उम्मीदवारी के बाद इस बात का दावा किया जा सकता है कि ये सीट भाजपा की झोली में जाना तय है।
मजेदार बात ये है कि जो दावेदार हैं वो पैरवी नहीं कर रहे हैं जबकि उनके चाहने वाले और कार्यकर्ता चाहते हैं कि पार्टी उन्हें इस बार जरूर उम्मीदवार बनाए। हालांकि, भाजपा कोई एक परिवार की पार्टी नहीं है, यहां सामूहिक फैसला होता है। इसलिए खुद भी कोशिश करनी चाहिए और दूसरों के जरिए कोशिश का प्रयास भी कराना चाहिए तभी कुछ बात बन सकती है। अब देखते हैं कि आगे क्या होता है।