ट्रांसफर पोस्टिंग सरकारी नौकरी की बेहद सामान्य प्रक्रिया है। इसके मायने निकालना सही बात नहीं है। हां किसी अनियमितता या गड़बड़ी में कोई अधिकारी हटाया जाए तो बात अलग होती है। मगर महेन्द्र सिंह तंवर के मामले में ऐसा कुछ नहीं था। गाजियाबाद के नगर आयुक्त रहे आईएएस महेन्द्र सिंह तंवर को रूटीन के तहत ट्रांसफर किया गया था। लेकिन तंवर के हटने के बाद कुछ पार्षद इतने खुश हो गए कि मिठाई तक बांट दी गई। गाजियाबाद का सामान्य नागरिक भी महेन्द्र सिंह तंवर के काम करने के तरीके से वाकिफ है। नगर आयुक्त कोई भी रहे वह इस संस्था की आय बढ़ाने के लिए काम करेगा ही। नगर निगम की आय बढ़ाने का तरीका अपनी संपत्ति का किराया और टैक्स ही है। नगर निगम की संपत्तियों का वर्तमान में किराया पांच सौ से लेकर दो-ढाई हजार तक है। वही मार्केट में यही किराया बीस से तीस हजार तक है। ऐसे में अगर नगर निगम अपना किराया बढ़ाना चाहता है तो गलत क्या है। मगर पार्षद हिमांशु मित्तल महेन्द्र सिंह तंवर के तबादले पर इतने खुश हुए कि मिठाई तक बांट दी। चाहे कुछ भी हो, कोई कुछ भी कहे महेन्द्र सिंह तंवर ने गाजियाबाद के हित में कई काम शुरू किए। कूड़े की समस्या का ऐसा निस्तारण शायद ही कहीं हुआ हो जैसा गाजियाबाद में हुआ है। तंवर के व्यवहार से भी सभी परिचित हैं, जब भी जिससे भी मिलते थे गर्म जोशी से मिलते थे। इतने व्यवहार कुशल अधिकारी बहुत कम ही मिलते हैं। अपने लोगों का हित तो सभी चाहते हैं इसमें गलत क्या है। पार्षद हिमांशु मित्तल द्वारा महेन्द्र सिंह तंवर के जाने पर मिठाई बांटना सभी को अखर रहा है। लोग इसे अच्छा परंपरा नहीं मान रहे हैं। जबकि भाजपा के ही कुछ पार्षद कह रहे हैं कि तंवर को अभी कम से कम छह महीने गाजियाबाद में ही रहना चाहिए था। यह बात अलग है कि तंवर ने नगर आयुक्त रहते हुए गोपनीय जांच शुरू कराई थी, जिसके पूरा होने पर कई लोग जेल जा सकते थे। हो सकता ही बात मिठाई बंटने का कारण रहा हो।