– राजा वर्मा ने कहा, यह किसानों की पंचायत नहीं, विरोधी दलों का जमावड़ा था
गाजियाबाद। रविवार को केंद्र सरकार की तीन कृषि सुधार कानूनों को लेकर मुजफ्फरनगर के जीआईसी ग्राउंड में आयोजित महापंचायत जुटी भारी भीड़ से भाजपा नेतृत्व के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई है, हालांकि यह बात और है कि उत्तर प्रदेश के नेता इस महापंचायत के बाद चिंतित होने की बात से इनकार कर रहे हैं। केंद्र की तीन कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी को कानून की शक्ल देने को लेकर पिछले दस माह से किसान दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन ने कई उतार चढ़ाव देखे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में रविवार को मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान पर एक महापंचायत बुलाई गई थी। इस महापंचायत में राकेश टिकैत ही आकर्षण के केंद्र में थे। भारी संख्या में गाडिय़ों के काफिले के साथ राकेश टिकैत के महापंचायत पहुंचनेे पर वहां का वातावरण केंद्र सरकार और भाजपा विरोधी हो गया। मौके को भांपते हुए राकेश टिकैत ने भी केंद्र और भाजपा पर जमकर हमला बोला।
उन्होंने मंच से टिकैत अल्लाहु-अकबर और हर-हर महादेव के नारे भी लगवाए। टिकैत ने कहा कि भाजपा के लोग बांटने का काम कर रहे हैं। हमें इन्हें रोकना है। हम यूपी की जमीन को दंगा करवाने वालों का नहीं होने देंगे।
उन्होंने संकल्प लेते कहा कि दिल्ली की सीमाओं को नहीं छोड़ेंगे भले ही वहां हमारी कब्र क्यों न बन जाए। जरूरत पडऩे पर हम अपनी जान भी दे देंगे लेकिन जब तक विजयी नहीं होंगे, धरनास्थल नहीं छोड़ेंगे।
वहीं, महापंचायत में जुटी भीड़ और वहां भाजपा के खिलाफ नाराजगी के बाद भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर चिंता छा गई है। भाजपा की चिंता बढऩे के कई कारण भी है। एक तो विधानसभा चुनाव से ऐन पहले जिस तरह से विपक्षी दल खासकर रालोद और सपा किसानों के समर्थन में खुल कर सामने आ गए हैं, उससे पश्चिम उप्र की राजनीति में एकाएक परिवर्तन से इनकार नहीं किया जा सकता है। दूसरी ओर, किसानों से बातचीत करने के लिए भाजपा के अंदर से भी आवाज उठने लगी है। भाजपा सांसद वरुण गांधी ने खुलकर किसानों से बातचीत कर उनकी शंकाओं को दूर करने की वकालत की है।
वहीं, भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजा वर्मा ने कहा कि रविवार की पंचायत को राजनीतिक दलों का जमावड़ा करार दिया।
युग करवट से बातचीत में उन्होंने कहा कि कल की महापंचायत से भाजपा की चिंताएं नहीं बढ़ी है। ये तो विरोधी दलों का जमावड़ा था जो हर चुनाव से पहले होता रहा है। महापंचायत में यूपी के किसान कहां थे। महापंचायत में यूपी के किसान नहीं थे। वहां तो हरियाणा और पंजाब के किसानों को लाया गया था।
राजा वर्मा ने कहा कि मलिक खाप और भाकियू भानु गुट ने महापंचायत का बहिष्कार किया। इससे पता चलता है कि महापंचायत में स्थानीय किसान नहीं थे। मंच पर जिस तरह से श्रीराम मंदिर के विरोध में कहा गया, उसे क्या किसान स्वीकार करेंगे? राजा वर्मा ने कहा कि असली किसान तो अपने खेतों में फसल उगा रहे हैं। मंच पर कृषि सुधार कानूनों को लेकर चर्चा क्यों नहीं की गई?
राजा वर्मा ने चुनौती दी है कि राकेश टिकैत और नरेश टिकैत बीस हजार किसान लेकर आए और उनके सामने कृषि सुधार कानूनों को लेकर चर्चा करें, तब हकीकत का पता चल जाएगा।
उन्होंने कहा कि मंच से कहा गया कि बिजली बेच दी, लेकिन आज किसानों को हर वक्त बिजली मिल रही है। यह किस प्रकार का मंच था, जहां किसानों के हित के बारे में कोई बात ही नहीं की गई।
वहीं, पूर्व मेयर अशु वर्मा ने सरकार और किसान संगठनों के बीच वार्ता के जरिए मुददों को सुलझाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कल की पंचायत से भाजपा परेशान नहीं है लेकिन इस मसले का सदभावपूर्ण हल होना चाहिए। सरकार और किसान संगठनों के बीच वार्ता के जरिए एक सर्वमान्य हल निकलना चाहिए जो दोनों पक्षों को मान्य हो। वरुण गांधी क्या कह रहे हैं, उस पर कोई टिप्पणी नहीं करुंगा लेकिन सरकार को फिर से बातचीत की पहल करनी चाहिए। वहीं, भाजपा किसान मोर्चा के महानगर अध्यक्ष पंकज भारद्वाज कहा कि राकेश टिकैत अपना काम कर रहे हैं, सरकार अपना काम कर रही है। मोदी सरकार ने किसानों के हित में इतने फैसले लिए जिसे सोचा तक नहीं जा सकता है।