रोहित शर्मा
गाजियाबाद (युग करवट)। कल यानि बुधवार का दिन महानगर कांग्रेस कमेटी के लिए खास मायने रखने वाला होगा। कल शाम कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष एवं पश्चिमी यूपी प्रभारी नसीमुद्दीन सिद्दीकी कंपनी बाग स्थित कांग्रेस के महानगर कार्यालय में पधार रहे हैं। नगर निगम चुनाव को लेकर महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लोकेश चौधरी की ओर से इस बैठक का मैसेज कई दिन पूर्व ही फ्लैश कर दिया गया था। बैठक में प्रांतीय अध्यक्ष जहां एक तरफ महानगर कांग्रेस कमेटी के संगठन की समीक्षा करेंगे, वहीं दूसरी ओर महानगर अध्यक्ष भी उनके सामने महानगर के 100 वार्डों एवं महापौर सीट का लेखा जोखा रखेंगे। कल होने वाली बैठक नगर निगम चुनाव के हिसाब से महानगर कांग्रेस की रणनीति के बारे में भी कई अहम जानकारियां देगी।
दरअसल, महानगर कांग्रेस कमेटी नगर निगम में सबसे बड़ा विपक्षी दल है। महापौर के चुनाव में भी कांग्रेस ही नगर निगम में अभी तक सत्ताधारी भाजपा को चुनौती देती आई है। पिछले चुनाव में गाजियाबाद महानगर के 100 वार्डों में से 61 पर भाजपा के पार्षदों ने जीत दर्ज की थी। विपक्ष की बात की जाए तो कांग्रेस के 15, बसपा के 12, समाजवादी पार्टी के 5 और 7 अन्य पार्षद जीतकर नगर निगम के सदन में पहुंचे थे। महापौर सीट की बात की जाए तो सन 2017 में महापौर सीट महिला के लिए आरक्षित हुई थी। इस सीट पर भाजपा कैंडिडेट आशा शर्मा ने 1,63,675 वोटों में जीत दर्ज की थी। कुल पड़े 5,67,118 वोटों में से आशा शर्मा के हिस्से में 49.86 प्रतिशत के हिसाब से 2,82,793 वोट आए थे। कांग्रेस की उम्मीदवार डौली शर्मा को 1,19,118 बसपा की कैडिडेट मुन्नी चौधरी को 77,033, समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी राशि गर्ग को 40,623 वोट मिले थे। हां, भाजपा प्रत्याशी आशा शर्मा के आसपास तक पहुंचे वाली कांग्रेस की डौली शर्मा ही थीं। ऐसे में इस बार भी कांगेे्रस की ओर से भाजपा कैंडिडेट को मजबूत टक्कर मिल सकती है।
प्रांतीय अध्यक्ष नसीमुद़्दीन सिद्दीकी को इस बात के लिए आश्वस्त करना होगा कि कांग्रेस कोई वार्ड खाली नहीं छोड़ेगी। साथ ही इस बार कांग्रेस के टिकट पर जीतने वाले पार्षदों की संख्या पिछली बार से कहीं अधिक होगी। नसीमद्दीन सिद्दीकी को उन्हें यह भी समझाना होगा कि महापौर पद के लिए के लिए कांग्रेस पार्टी के पास मजबूत उम्मीदवार है। ऐसा कैंडिडेट है जो भाजपा को मजबूती के साथ चुनौती देने में सक्षम होगा। महानगर अध्यक्ष को यह भी ध्यान रखना होगा कि प्रांतीय अध्यक्ष महानगर कांग्रेस कमेटी को अनुशासन की कसौटी पर भी परखेंगे। क्योंकि, अनुशासनहीता की समस्या से महानगर काग्रेस कमेटी पूर्व में ही जूझती रही है। कुल मिलाकर महानगर कांग्रेस कार्यालय पर कल होने वाली बैठक कई मायनों में बेहद ही अहम है। कल इस रणनीति का निर्धारण भी हो जाएगा कि नगर निगम चुनाव में देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस पहली बार गाजियाबाद में जीत का सपना संजोए किस तरह से उतर रही है।