युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। एक ऐसा नाम जो गाजियाबाद की सरजमीं से निकलकर दुनिया के कई देशों में गूंजा। ऐसे महाकवि कुंअर बेचैन की याद में कल हिन्दी भवन समिति ने हिन्दी पखवाड़े को समर्पित करते हुए हिन्दी भवन में कार्यक्रम रखा, जिसमें सभी ने अपनी कविताओं से जहां डॉ. कुंअर बेचैन को याद किया वहीं उनके चाहने वालों की आंखें पूरे कार्यक्रम में नम रहीं। इतना ही नहीं अपने आप को पत्थर कहने वाले जाने-माने कवि हरिओम पंवार भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। देश के जाने-माने कवि चेतन आनंद और प्रवीण शुक्ला तो माइक पर आने के बाद फूट-फूटकर रो पड़े। दरअसल, प्रवीण शुक्ला और चेतन आनंद का कुंअर बेचैन साहब से बहुत ही करीबी रिश्ता था। चेतन आनंद ने तो यहां तक कहा कि स्व. बेचैन जी के जाने के बाद अब वो तीन लोगों के चेहरे बंद आंखों से पहले देखते हैं फिर अपनी आंखे खोलते हैं। वो चेहरे हैं उनके गुरु कुंअर बेचैन जी, माता और पिता।
कार्यक्रम में दुनिया के कई देशों में अपनी कविता से नाम रोशन करने वाली डॉ. रमा सिंह ने भी डॉ. कुंअर बेचैन साहब की कई यादों को साझा किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रवीण शुक्ला ने तो कहा कि सभी आज से डॉ. कुंअर बेचैन को कवि नहीं महाकवि के नाम से जानें और उन्होंने सरकार से उन्हें पद्मश्री देने की मांग भी की। कार्यक्रम में लोगों की संख्या भले ही कम थी, लेकिन जो लोग थे वो वास्तव में बेचैन साहब से मोहब्बत करते थे और इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई घंटे कार्यक्रम में मौजूद रहे। अंतर्राष्टï्रीय ख्याति प्राप्त कवि कृष्ण मित्र जी जिनकी आयु ८९ वर्ष की हो रही है, सेहत ठीक नहीं है फिर भी वो बेचैन जी के बारे में बोले ही नहीं बल्कि उनकी यादों को भी ताजा किया।
इस दौरान सभी कवियों ने एक स्वर में कुंवर बेचैन के लिए पद््मश्री देेने की मांग की। मंत्री अतुल गर्ग ने गृह मंत्रालय से कुंवर बेचैन को पद््मश्री देने की संस्तुति का पत्र उनकी पुत्री वंदना कुंअर को मंच पर सौंपा। वंदना कुंवर मंच पर कविता पढऩे के दौरान फफक कर रो पड़ीं।
मुख्य अतिथि डॉ. हरिओम पंवार ने इस मौके पर कहा कि मैं तो सिर्फ एक प्रसिद्ध कवि हूं, डॉ. कुंवर बेचैन प्रसिद्ध भी थे और सिद्ध भी थे। उन्होंने इस मौके पर कारगिल शहीदों की याद में लिखी अपनी कविता पढ़ी…मैं केशव का पांचजन्य भी गहन मौन में खोया हूं, उन बेटों को आज कहानी लिखते-लिखते रोया हूं। मुख्य वक्ता डॉ. प्रवीण शुक्ल ने कुंअर बेचैन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने साहित्य के लिए जो योगदान दिया है, वह अतुलनीय है। विजेंद्र सिंह परवाज की अध्यक्षता में इस कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें उन्होंने कहा कि कुंअर एक विश्वविद्यालय हिंदी के सफल कलाकार रहे।
इनके अलावा कवि कृष्ण मिश्र, डॉ. रमा सिंह, शिवकुमार बिलगरानी, अंजू जैन, सपना सोनी, डॉ. तारा गुप्ता, चेतन आनंद, गार्गी कौशिक, डॉ. अल्पना सुहासिनी और राज कौशिक ने कविताएं पढ़ीं। इस दौरान कार्यक्रम का संचालन राज कौशिक ने किया। हिंदी समिति के अध्यक्ष ललित जायसवाल एवं महामंत्री सुभाष गर्ग ने सभी का स्वागत किया। कार्यक्रम में भाजपा के राज्यमंत्री बलदेवराज शर्मा, भाजपा नेता पृथ्वी सिंह कसाना, युग करवट के प्रधान संपादक सलामत मियां, वीके शर्मा, हनुमान, हिमांशु लव, गजल गायक शानू बब्बन आदि मौजूद रहे। वहीं हिन्दी में अच्छे नंबर लाने वालों को सम्मानित भी किया गया।
सभी की आंखे नम थीं
गीत-गजलों और छंदों से पुकारू मैं सदा आपको पावन धरोहर को संभालूं मैं सदा आप से जो सीख ली वो ही निभाऊं मैं सदा आपकी बिटिया ही बनकर जन्म पाऊं मैं सदा-ये लाइनें डॉ. कुंवर बेचैन की बेटी वंदना रायजादा ने अपने पिता को समर्पित की। इन लाइनों को सुनाते-सुनाते वंदना इतनी भावुक हो उठीं कि मंच पर ही रोने लगीं। इस भावुक क्षण में वहां मौजूद सभी लोगों और मंच पर आसीन अतिथियों की भी आंखें नम हो गईं। ये एक ऐसा कार्यक्रम था जिसमें लोगों को हंसाने वाले माहौल को एक अलग अंदाज देने वाले सभी कवियों की आंखे नम थीं।