युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। प्रताप विहार योजना के गांव मिर्जापुर में जीडीए द्वारा अधिग्रहित कई करोड़ रुपये की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर जीडीए सख्त हो गया। जीडीए के भू अर्जन विभाग ने जमीन की जांच शुरू कर दी है। इस जमीन की प्रारभिंक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है। पता चला है कि यह पूरी जमीन मिर्जापुर के गांव के खसरा नंबर 287 में शामिल है। जीडीए ने इस जमीन के अधिग्रहण के लिए 1969 में नोटिफिकेशन जारी किया था। नोटिफिकेशन के बाद जीडीए ने जमीन के अधिग्रहण और मुआवजा अदा करने की प्रक्रिया पूरी की। अधिग्रहण के तीन वर्ष बाद यानि 1972 में जीडीए ने पूरी जमीन पर कब्जा भी प्राप्त कर लिया। जीडीए के नियोजन विभाग सूत्रों के मुताबिक जीडीए ने वर्ष 1975 में योजना का ले-आउट प्लान तैयार किया। योजना में खसरा नंबर 287 की जमीन को व्यवसायिक प्रॉपर्टी बनाने के लिए जीडीए ने रिजर्व कर दिया। अब इसी जमीन पर कुछ लोगोंं ने मार्केट बना दिया। जीडीए को अपनी जमीन का पता आईजीआरएस पॉर्टल पर जीडीए वीसी कृष्णा करुणेश से की गई शिकायत के बाद पता चला। अब इसकी जांच नियोजन-भूर्जन विभाग ने शुरू कर दी है। अब पेमाइश का कार्य शुरू हो गया। जल्दी ही पता चलेगा कितनी जमीन अवैध कब्जे में है।