युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रदेश में राजनीतिक दल सभी दांव पेंच खेल रहे हैं। प्रदेश के राजनीतिक दलों के बीच चुनाव की बिसात पूरी तरह से बिछ चुकी है। कांग्रेस ने भी पार्टी की राष्ट्र्रीय महासचिव एवं यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी के नेतृत्व में पूरी ताकत के साथ विधानसभा चुनाव की जंग का ऐलान कर दिया है।
कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर गौर किया जाए तो पार्टी हाईकमान के निर्देश पर जहां एक तरफ जनसमस्याओं पर पार्टी मुखर है तो वहीं दूसरी ओर भावनात्मक मुद्दों की डोर पकड़कर आगे बढऩे की रणनीति अमल में लाई जाती नजर आ रही है। प्रियंका गांधी खुद भावनात्मक मुद्दों को छेड़ रही हैं और पार्टी के नेता और कार्यकर्ता गांवों चौपालों और शहर की गलियों में जाकर भावनात्मक तरीके अपनाकर लोगों से तालमेल बिठा रहे हैं। देखना होगा कि भावनात्मक मुद्दों की डोर पकड़कर आगे बढ़ रही कांग्रेस अपनी इस रणनीति में कितना सफल हो पाती है।
दरअसल, कांग्रेस लगातार उत्तर प्रदेश में हाशिए पर जा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी पूरे जुगाड़ लगाने के बाद भी सात सीटों पर ही सिमट गई। ये हाल तब हुआ जब कांग्रेस ने सत्ता में रही समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया था। यह गठबंधन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों पर भारी पड़ गया और कांग्रेस मात्र सात सीटों पर ही सिमट गई।
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में यह कांग्रेस का सबसे न्यूनतम स्कोर था। पार्टी अब एक बार फिर से 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी है। इस बार माहौल कुछ बदला हुआ है। पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू प्रियंका गांधी द्वारा नियुक्त हुए हैं। प्रदेश कमेटी प्रियंका गांधी ने खुद बनाकर उन्हें दी है। यहां तक कि जिला और महानगर अध्यक्ष भी प्रियंका गांधी के ही निर्देश पर बनाए गए हैं। प्रियंका गांधी द्वारा चुनी गई इस नई टीम के सामने अब 2022 का चुनाव फतह करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निर्धारित लक्ष्य के प्राप्त करने के लिए पार्टी हाईकमान ने नई गाइडलाइन भी जारी की हैं। कांग्रेसी लीडर लगातार जनसमस्याओं को उठाने के साथ ही भावनात्मक मुद्दों पर जोर दे रहे हैं। कांग्रेसी दुख और सुख बांटने का काम खुलकर करते हुए नजर आ रहे हैं। किसी कांग्रेसी के परिजन के निधन के बाद पार्टी अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी का शोक संदेश लेकर पहुंचते हैं। गत दिनों पंचायत चुनाव में जीते लोगों को कांग्रेस के नेताओं ने प्रियंका गांधी द्वारा भेजे गए बधाई संदेश भिजवाए। कोरोना से बचाव की किट लोगों में बंटवाई गई। कोरोना किट के जरिए कांग्रेसियों ने जनता के बीच सद्भावना का संदेश बांटा।
कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता ही नहीं पार्टी प्रभारी प्रियंका गांधी भी लगातार भावनात्मक मुद्दे पकड़कर जनता के बीच कांग्रेस की पकड़ मजबूत करने का काम कर रही हैं। लखीमपुर खीसी हादसे के बाद प्रियंका ने वहां कूच किया। गिरफ्तारी के बाद गेस्ट हाऊस में झाडू लगाकर दलितों और महिलाओं से भावनात्मक तरीके से जुडऩे पर भी उनका फोकस रहा। इससे पूर्व सोनभद्र, उम्भा, उन्नाव कांड के बाद प्रियंका गांधी ने वहां पहुंचकर भावनात्मक संदेश दिया।
भावनात्मक मुद्दों को उठाने का लाभ कांग्रेस को विधानसभा चुनावों में मिले या ना मिले, लेकिन इससे पार्टी चर्चाओं में जरूर आ गई है। आम जनता के बीच प्रियंका गांधी की चर्चा होने लगी है। लोग प्रदेश में प्रियंका की मौजूदगी को खुलकर मानने लगे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का यह भावनात्मक ब्रह्मास्त्र कितना कामयाब हो पाता है।