युग करवट ब्यूरो
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि चीतों के पुनर्वास के लिए पूरा देश नई ऊर्जा के साथ जुट गया है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ये दुर्भाग्य रहा कि हमने 1952 में चीतों को देश से विलुप्त तो घोषित कर दिया, लेकिन उनके पुनर्वास के लिए दशकों तक कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ। पीएम मोदी ने कहा कि ये बात सही है कि, जब प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण होता है तो हमारा भविष्य भी सुरक्षित होता है। विकास और समृद्धि के रास्ते भी खुलते हैं। कुनो नेशनल पार्क में जब चीता फिर से दौड़ेंगे, तो यहां का ग्रासलैंड इकोसिस्टम फिर से बढ़ेगा। अंतर्राष्ट्रीय गाइडलाइन्स पर चलते हुए भारत इन चीतों को बसाने की पूरी कोशिश कर रहा है। हमें अपने प्रयासों को विफल नहीं होने देना है। कूनो नेशनल पार्क में छोड़े गए चीतों को देखने के लिए देशवासियों को कुछ महीने का धैर्य दिखाना होगा, इंतजार करना होगा। आज ये चीते मेहमान बनकर आए हैं, इस क्षेत्र से अनजान हैं। कुनो नेशनल पार्क को ये चीते अपना घर बना पाएं, इसके लिए हमें इन चीतों को भी कुछ महीने का समय देना होगा। प्रकृति और पर्यावरण, पशु और पक्षी, भारत के लिए ये केवल सस्टेनबिलिटी और सुरक्षा के विषय नहीं हैं। आज 21वीं सदी का भारत, पूरी दुनिया को संदेश दे रहा है कि इकोनॉमी और ईकोलॉजी कोई विरोधाभाषी क्षेत्र नहीं है। पर्यावरण की रक्षा के साथ ही, देश की प्रगति भी हो सकती है, ये भारत ने दुनिया को करके दिखाया है।